बालोद, 28 अक्टूबर। छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में ससुर की हत्या के मामले में अदालत ने बहू और उसके प्रेमी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। दोनों ने मिलकर बुजुर्ग को करंट लगाकर मौत के घाट उतार दिया था। इसके बाद हत्या को हादसा बताकर मामले को दबाने की कोशिश की गई। हालांकि, अंतिम संस्कार के दौरान मृतक के शरीर पर चोट और जलने के निशान देखकर ग्रामीणों को संदेह हुआ। पुलिस की जांच में हत्या का खुलासा हुआ।
मामला डौंडीलोहारा थाना क्षेत्र के ग्राम खड़ेनाडीह का है। मृतक की पहचान मनोहर निर्मलकर (63) के रूप में हुई है। मामले में उनकी बहू गीताबाई निर्मलकर (30) और उसके प्रेमी लेखराम निषाद (25) को दोषी ठहराया गया है।

हारमोनियम सिखाने घर आता था प्रेमी, ससुर करता था विरोध
पुलिस के मुताबिक, गीताबाई गांव की सेवा मंडली में भजन गाने जाती थी। इसी दौरान उसकी मुलाकात पड़ोसी गांव के संगीतकार लेखराम निषाद से हुई। लेखराम उसे हारमोनियम सिखाता था। धीरे-धीरे दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ गईं।

लेखराम का अक्सर हारमोनियम सिखाने के बहाने घर आना मनोहर निर्मलकर को पसंद नहीं था। वह इस बात का विरोध करता था और कई बार गाली-गलौज भी करता था। इसी विरोध से परेशान होकर गीताबाई और लेखराम ने ससुर की हत्या की साजिश रची।
सोते समय करंट लगाकर की हत्या
पुलिस जांच के अनुसार, दोनों ने 29 जून 2025 को हत्या की साजिश रची थी। इसके बाद 16 जुलाई की रात करीब 12 बजे सो रहे मनोहर निर्मलकर को करंट लगाकर मार डाला। वारदात के बाद आरोपियों ने मौत को सामान्य हादसा दिखाने की कोशिश की, ताकि किसी को उन पर शक न हो।
साइकिल से गिरने की कहानी सुनाकर गुमराह किया
17 जुलाई की सुबह गीताबाई ने ग्रामीणों को बताया कि उसके ससुर रात में शराब पीकर साइकिल से गिर गए थे। इसी वजह से उन्हें चोटें आई थीं और सुबह उनकी मौत हो गई।
जब मोहल्ले की महिलाएं कफन लेकर घर पहुंचीं, तो उन्होंने मृतक के शरीर पर हल्दी लगी देखी। पूछने पर बहू ने बताया कि गिरने से चोट आई थी, इसलिए हल्दी लगाई गई है।
हालांकि, अंतिम संस्कार के दौरान जब शव से कपड़ा हटाया गया, तो शरीर पर चोट और जलने के गहरे निशान दिखाई दिए। इससे ग्रामीणों को मौत की परिस्थितियों पर संदेह हुआ और उन्होंने पुलिस को सूचना दी।
अंतिम संस्कार की जल्दबाजी से बढ़ा शक
पुलिस के अनुसार, हत्या के बाद लेखराम निषाद जल्द से जल्द अंतिम संस्कार करवाना चाहता था। उसे आशंका थी कि देर होने पर लोगों को शक हो सकता है। इसी वजह से उसने सुबह होते ही श्मशान में लकड़ियां भिजवा दीं और अंतिम संस्कार की तैयारी में जुट गया।
उसने घरवालों और ग्रामीणों से जल्द अंतिम संस्कार करने की बात कही। जब गांव के कुछ प्रमुख लोगों को इसकी जानकारी मिली, तो उन्होंने श्मशान पहुंचकर उससे सवाल किए।
ग्रामीणों ने पूछा कि जब वह मृतक का बेटा या रिश्तेदार नहीं है, तो अंतिम संस्कार की इतनी जल्दी क्यों कर रहा है। इसी बीच शव के शरीर पर गहरे घाव दिखाई दिए। ग्रामीणों का संदेह बढ़ गया और पुलिस को सूचना दी गई।
पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और तकनीकी सबूतों से खुला राज
पुलिस ने मामले में मर्ग कायम कर जांच शुरू की। पोस्टमॉर्टम की प्रारंभिक रिपोर्ट में मौत का कारण बिजली का करंट लगना सामने आया। इसके बाद पुलिस ने परिवार के सदस्यों की गतिविधियों, उनके संपर्कों और घटना से जुड़े अन्य पहलुओं की पड़ताल की।
जांच के दौरान पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और कॉल डिटेल सहित तकनीकी साक्ष्य जुटाए। पुलिस ने घटना से जुड़े बिजली के तार, रबर के दस्ताने, खून लगा गमछा और मोबाइल फोन भी जब्त किए।
इन साक्ष्यों और जांच के आधार पर पुलिस आरोपियों तक पहुंची। दोनों के खिलाफ न्यायालय में चालान पेश किया गया।
अदालत ने दोनों को सुनाई उम्रकैद
मामले की सुनवाई के बाद एडीजे न्यायालय ने गीताबाई निर्मलकर और उसके प्रेमी लेखराम निषाद को हत्या का दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
मामले की जांच तत्कालीन थाना प्रभारी निरीक्षक मुकेश सिंह ने की थी। राज्य शासन की ओर से विशेष लोक अभियोजक घनश्याम सिंह साहू ने न्यायालय में पैरवी की।


