28 Oct 2026, Wed
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कलिंगा यूनिवर्सिटी में डॉ. ललित भसीन के नाम पर मूट कोर्ट हॉल: सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता ने विद्यार्थियों को दिए सफलता के मंत्र

नया रायपुर, 28 अक्टूबर। कलिंगा विश्वविद्यालय, नया रायपुर के विधि संकाय ने भारतीय विधि जगत की प्रतिष्ठित हस्ती और सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. ललित भसीन के सम्मान में अपने अत्याधुनिक मूट कोर्ट हॉल का नामकरण किया है। यह पहल विधि शिक्षा, व्यावहारिक वकालत प्रशिक्षण और शैक्षणिक उत्कृष्टता के प्रति विश्वविद्यालय की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

इस अवसर पर विश्वविद्यालय के विधि संकाय द्वारा 24 अक्टूबर को विशिष्ट विधिवेत्ता व्याख्यान श्रृंखला का आयोजन किया गया। इसमें डॉ. ललित भसीन, अध्यक्ष, सोसाइटी ऑफ इंडियन लॉ फर्म्स (SILF), नई दिल्ली ने विद्यार्थियों को संबोधित किया। वहीं, 26 अक्टूबर को मूट कोर्ट हॉल के आधिकारिक नामकरण समारोह का आयोजन किया गया।

विद्यार्थियों को मिलेगा वास्तविक न्यायालयीन वातावरण का अनुभव

नव-नामित अधिवक्ता (डॉ.) ललित भसीन मूट कोर्ट हॉल आधुनिक सुविधाओं और अत्याधुनिक ऑडियो-विजुअल तकनीक से सुसज्जित है। इसे इस तरह विकसित किया गया है कि विधि के विद्यार्थियों को वास्तविक न्यायालयीन वातावरण का अनुभव मिल सके और वे व्यावहारिक प्रशिक्षण के माध्यम से अपनी वकालत संबंधी दक्षताओं को निखार सकें।

इस हॉल में राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मूट कोर्ट प्रतियोगिताओं, विधिक वकालत कार्यशालाओं और मुकदमेबाजी के व्यावहारिक अभ्यास सत्रों का आयोजन किया जा सकेगा। इससे विद्यार्थियों को न्यायालयीन प्रक्रियाओं, विधिक तर्कों की प्रस्तुति और प्रभावी वकालत की बारीकियां सीखने का अवसर मिलेगा।

डॉ. ललित भसीन ने विद्यार्थियों को दिया मार्गदर्शन

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डॉ. ललित भसीन ने अपने व्यावसायिक जीवन के अनुभव साझा किए। उन्होंने विद्यार्थियों को व्यावसायिक ईमानदारी, नैतिक मूल्यों और संवैधानिक सिद्धांतों के प्रति प्रतिबद्ध रहने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने विधि व्यवसाय में सफलता के लिए ज्ञान, दक्षता और सत्यनिष्ठा के महत्व पर जोर दिया।

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उनकी उपस्थिति से विद्यार्थियों को विधि के क्षेत्र में लंबे अनुभव और उल्लेखनीय योगदान रखने वाले विशेषज्ञ से सीधे संवाद करने का अवसर मिला।

विधि शिक्षा को व्यावहारिक बनाने पर जोर

कलिंगा विश्वविद्यालय का विधि संकाय सैद्धांतिक ज्ञान और न्यायालयीन व्यवहार के बीच की दूरी कम करने के उद्देश्य से लगातार प्रयास कर रहा है। इसके तहत मूट कोर्ट प्रतियोगिताओं, विधिक चर्चाओं और अनुभव-आधारित शिक्षण गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा रहा है।

संकाय ने सुराना एंड सुराना के सहयोग से मूट कोर्ट गतिविधियों और वार्षिक अंतर-विश्वविद्यालय प्रतियोगिताओं के माध्यम से विद्यार्थियों को व्यावहारिक अनुभव उपलब्ध कराया है। इसके अलावा, मूट कोर्ट वकालत, विधिक प्रारूपण और व्यावसायिक कौशल पर केंद्रित विशेष पाठ्यक्रम शुरू करने की योजना भी बनाई जा रही है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं और भविष्य की न्यायालयीन कार्यवाही के लिए तैयार करना है।

विश्वविद्यालय के वरिष्ठ पदाधिकारी रहे उपस्थित

कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के अध्यक्ष डॉ. राजीव कुमार, कुलपति प्रो. (डॉ.) आर. श्रीधर, प्रति-कुलपति डॉ. मोनिका सेठी शर्मा, अधिष्ठाता अकादमिक मामले एवं परीक्षा नियंत्रक डॉ. राहुल मिश्रा तथा विधि संकाय के अधिष्ठाता प्रो. (डॉ.) अज़ीम खान बी. पठान प्रमुख रूप से उपस्थित रहे। इनके साथ विश्वविद्यालय के अन्य अधिष्ठाता, विभागाध्यक्ष और संकाय सदस्यों ने भी सहभागिता की।

कार्यक्रम का आयोजन विधि संकाय के अधिष्ठाता प्रो. (डॉ.) अज़ीम खान बी. पठान और प्रभारी विभागाध्यक्ष सुश्री एकता चंद्राकर के मार्गदर्शन में किया गया। इसका समन्वय संकाय सदस्य सुश्री वंशिका कपूर, सुश्री नवांशु श्रीवास्तव और सहायक प्राध्यापक सुश्री ऐनम फातिमा ने किया।

भावी विधि विशेषज्ञों के लिए बनेगा प्रेरणा का केंद्र

डॉ. ललित भसीन के नाम पर मूट कोर्ट हॉल का नामकरण विश्वविद्यालय के विधि संकाय के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। विश्वविद्यालय का उद्देश्य इस पहल के माध्यम से उन विद्यार्थियों को प्रेरित करना है, जो वकालत, मुकदमेबाजी, न्यायिक सेवाओं, शिक्षण, विधिक अनुसंधान और जनसेवा के क्षेत्र में अपना करियर बनाना चाहते हैं।

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विश्वविद्यालय का मानना है कि न्याय व्यवस्था की मजबूती केवल प्रभावी कानूनों और संस्थानों पर निर्भर नहीं करती, बल्कि विधि विशेषज्ञों की सत्यनिष्ठा, दक्षता और संवैधानिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

कलिंगा विश्वविद्यालय का विधि संकाय शैक्षणिक उत्कृष्टता, विधिक अनुसंधान, व्यावहारिक प्रशिक्षण और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए प्रतिबद्ध है। व्याख्यानों, मूट कोर्ट प्रतियोगिताओं, विधिक सहायता गतिविधियों और कौशल-आधारित शिक्षण के माध्यम से विद्यार्थियों में न्याय एवं संवैधानिक शासन व्यवस्था के प्रति गहरी समझ विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है।

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