नई दिल्ली, 28 अक्टूबर। जनगणना-2027 में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) की जातियों की अलग सूची बनाने की मांग पर सुप्रीम कोर्ट ने अहम टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि यह नीतिगत निर्णय है, जिस पर केंद्र सरकार विचार कर सकती है। इसके साथ ही कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को अपनी मांग भारत के जनगणना रजिस्ट्रार जनरल के सामने रखने की अनुमति दी है।
यह याचिका OBC फेडरेशन ऑफ इंडिया की ओर से दाखिल की गई थी। इसमें मांग की गई थी कि ऑनलाइन जनगणना फॉर्म में OBC जातियों के लिए भी ड्रॉप-डाउन मेनू की व्यवस्था की जाए, ताकि विभिन्न पिछड़ी जातियों की पहचान और उनकी जानकारी व्यवस्थित तरीके से दर्ज की जा सके।

ऑनलाइन फॉर्म में OBC जातियों के लिए अलग विकल्प की मांग
28 अक्टूबर को हुई सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वकील अंजनी अयंगर ने अदालत को बताया कि याचिकाकर्ता पिछड़े वर्गों से आते हैं। उन्होंने सरकार से मांग की थी कि जनगणना की ऑनलाइन प्रक्रिया में OBC जातियों के लिए अलग सूची उपलब्ध कराई जाए।

याचिका में जनगणना के शेड्यूल के कॉलम नंबर 10 का हवाला दिया गया। इसमें अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और जाति से संबंधित जानकारी मांगी गई है। हालांकि, SC और ST के अलावा अन्य लोगों को अपनी जाति का नाम खुद लिखने के लिए ओपन टेक्स्ट फील्ड दिया गया है।
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि इस व्यवस्था के स्थान पर OBC जातियों के लिए भी ड्रॉप-डाउन मेनू होना चाहिए, जिससे जातियों की जानकारी एक समान प्रारूप में दर्ज की जा सके।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने मामले की सुनवाई की। पीठ में जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना भी शामिल थे।
अदालत ने कहा कि OBC जातियों की अलग सूची तैयार करने और जनगणना फॉर्म में इससे जुड़ी व्यवस्था करने का मामला नीतिगत निर्णय से संबंधित है। इस पर फैसला लेना सरकार के अधिकार क्षेत्र में आता है।
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को अपनी मांग भारत के जनगणना रजिस्ट्रार जनरल के समक्ष रखने की छूट दे दी। यानी अदालत ने इस मांग पर सीधे कोई आदेश देने के बजाय संबंधित अधिकारियों के सामने पक्ष रखने का रास्ता खुला रखा है।
2011 की जनगणना का दिया हवाला
याचिकाकर्ताओं ने अपनी मांग के समर्थन में 2011 की जनगणना का भी उल्लेख किया। उनका तर्क है कि जिस तरह अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की जातियों के लिए सूचीबद्ध विकल्प उपलब्ध कराए गए थे, उसी तरह OBC जातियों के लिए भी अलग विकल्प होना चाहिए।
उनके मुताबिक, इससे विभिन्न पिछड़ी जातियों का विवरण व्यवस्थित रूप से दर्ज करने में मदद मिल सकती है।
फिलहाल, OBC जातियों के लिए अलग ड्रॉप-डाउन मेनू उपलब्ध कराने को लेकर अंतिम फैसला केंद्र सरकार को लेना है। सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद अब इस मांग पर संबंधित सरकारी अधिकारियों के स्तर पर विचार किए जाने का रास्ता खुला है।


