रायपुर, 30 अक्टूबर। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय प्रवक्ता और राज्यसभा सांसद डॉ. सुधांशु त्रिवेदी ने शुक्रवार को कांग्रेस पर देश में अस्थिरता पैदा करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस संवैधानिक संस्थाओं और निर्वाचन आयोग के खिलाफ भ्रामक प्रचार करके लोगों के बीच भ्रम फैलाने की कोशिश कर रही है। त्रिवेदी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस का उद्देश्य केवल सत्ता में वापस आना नहीं, बल्कि देश में अराजकता का माहौल पैदा करना है।
रायपुर स्थित भाजपा के प्रदेश कार्यालय में पार्टी के ‘लोकतंत्र बचाओ–अराजकता हटाओ’ अभियान के तहत आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में त्रिवेदी ने चुनावी प्रक्रिया में गड़बड़ी के कांग्रेस के आरोपों पर सवाल उठाए। उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व से पूछा कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया के दौरान निर्धारित चरणों में आपत्तियां क्यों नहीं दर्ज कराई गईं।

उन्होंने कहा कि मतदाता सूचियां पहले जिला स्तर के राजनीतिक प्रतिनिधियों को उपलब्ध कराई जाती हैं। इसके बाद राज्य की चुनावी व्यवस्था और फिर भारत निर्वाचन आयोग के स्तर पर प्रक्रिया आगे बढ़ती है। प्रत्येक चरण में आपत्तियां दर्ज कराने का प्रावधान है।

त्रिवेदी ने सवाल किया, “अगर कांग्रेस कहती है कि जिला स्तर पर कोई आपत्ति नहीं उठाई गई, तो क्या वह अपने ही जिला अध्यक्षों की कार्यक्षमता पर सवाल उठा रही है? यदि राज्य स्तर पर भी आपत्तियां दर्ज नहीं कराई गईं, तो क्या कांग्रेस अपने प्रदेश संगठन की क्षमता पर सवाल खड़े कर रही है?”
उन्होंने कहा कि चुनावी प्रक्रिया पूरी होने के बाद आरोप लगाने के बजाय कांग्रेस को अपने बूथ लेवल एजेंटों (BLA), जिला अध्यक्षों और प्रदेश नेतृत्व से सवाल करना चाहिए।
त्रिवेदी ने मतदान केंद्रों के सीसीटीवी फुटेज 45 दिनों के बाद उपलब्ध नहीं होने संबंधी कांग्रेस के तर्क पर भी सवाल उठाए। हालिया विधानसभा और लोकसभा उपचुनावों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इनके नतीजे घोषित हुए अभी केवल 10 से 15 दिन हुए हैं। ऐसे में 45 दिनों की निर्धारित अवधि अभी समाप्त नहीं हुई है।
उन्होंने कहा, “कांग्रेस स्पष्ट करे कि वह निर्धारित समय सीमा के भीतर फुटेज मांगना चाहती है या 45 दिन बीतने का इंतजार करेगी और फिर हंगामा खड़ा करेगी।”
त्रिवेदी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस कानूनी प्रक्रियाओं पर जानबूझकर सवाल उठाकर भ्रम पैदा कर रही है और लोकतांत्रिक संस्थाओं पर जनता के विश्वास को कमजोर करने का प्रयास कर रही है।
राहुल गांधी के प्रस्तावित आंदोलन पर साधा निशाना
त्रिवेदी ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के प्रस्तावित आंदोलन की भी आलोचना की। उन्होंने आंदोलन के समय और दिल्ली की व्यावसायिक गतिविधियों पर इसके संभावित प्रभाव को लेकर सवाल उठाए।
उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी अपनी विदेश यात्रा से लौटने के बाद आंदोलन की तारीख तय करेंगे। त्रिवेदी ने दावा किया कि आंदोलन के लिए प्रस्तावित स्थान उत्तर भारत का एक महत्वपूर्ण व्यावसायिक केंद्र है।
नवरात्रि से दीपावली और छठ पूजा तक के त्योहारों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष इसी अवधि में लगभग 6 लाख करोड़ रुपये का कारोबार हुआ था।
उन्होंने सवाल किया कि क्या प्रस्तावित आंदोलन का उद्देश्य आर्थिक गतिविधियों को बाधित करना है? इस दौरान उन्होंने राहुल गांधी के उस पुराने बयान का भी उल्लेख किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि उनकी लड़ाई ‘इंडियन स्टेट’ (भारतीय राज्य व्यवस्था) के खिलाफ है।
त्रिवेदी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस केवल सरकार की नीतियों का विरोध नहीं कर रही, बल्कि निर्वाचन आयोग, न्यायपालिका, मीडिया और अन्य नियामक संस्थाओं की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाकर उन्हें बदनाम करने की कोशिश कर रही है।
राफेल, सर्जिकल स्ट्राइक और आर्थिक संस्थानों का किया उल्लेख
कांग्रेस पर देश की संस्थागत और आर्थिक विश्वसनीयता पर लगातार सवाल उठाने का आरोप लगाते हुए त्रिवेदी ने राफेल विवाद, सर्जिकल स्ट्राइक, बालाकोट एयरस्ट्राइक और ऑपरेशन सिंदूर का उल्लेख किया।
उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने राफेल सौदे को लेकर सरकार के फैसलों पर संदेह जताया और ऑपरेशन सिंदूर सहित सैन्य अभियानों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने इस संदर्भ में थल सेना, नौसेना और वायुसेना की भूमिका का भी उल्लेख किया।
कांग्रेस की आर्थिक आलोचनाओं का जवाब देने के लिए त्रिवेदी ने सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों के वित्तीय प्रदर्शन का हवाला दिया।
उन्होंने दावा किया कि भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) रिकॉर्ड मुनाफा दर्ज कर रहा है, भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने वित्त वर्ष 2017-18 के बाद अपना अब तक का सर्वाधिक मुनाफा दर्ज किया है और हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) के पास एक लाख करोड़ रुपये की ऑर्डर बुक है।
त्रिवेदी ने कांग्रेस पर भारत के कोविड-19 टीकाकरण अभियान को लेकर भ्रामक जानकारी फैलाने का आरोप भी लगाया। उन्होंने अप्रैल 2021 में बच्चों की वैक्सीन विदेश भेजे जाने संबंधी दावों का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय दुनिया में बच्चों के लिए कोई वैक्सीन विकसित नहीं हुई थी।
धर्म और संस्कृति को लेकर कांग्रेस की भूमिका पर सवाल
त्रिवेदी ने आरोप लगाया कि भारतीय धार्मिक परंपराओं और सांस्कृतिक मुद्दों पर कांग्रेस का रुख विरोधाभासी रहा है।
उन्होंने भाजपा शासित राज्यों की आलोचना के दौरान सहयोगी दलों द्वारा कथित तौर पर इस्तेमाल किए गए ‘गोमूत्र वाले राज्य’ जैसे शब्दों का उल्लेख किया। साथ ही उन्होंने सवाल उठाया कि यदि कांग्रेस गोबर और गोमूत्र के जैविक खेती में उपयोग को स्वीकार करती है, तो अन्य स्थानों पर इसका मजाक क्यों उड़ाया जाता है?
उन्होंने छत्तीसगढ़ में वर्ष 2020 में तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व वाली सरकार की उस पहल का उल्लेख किया, जिसमें जैविक खेती के लिए गोबर और गोमूत्र के उपयोग को प्रोत्साहित किया गया था।
त्रिवेदी ने सवाल किया, “अगर छत्तीसगढ़ में गोबर और गोमूत्र का उपयोग स्वीकार्य था, तो दूसरे राज्यों में इसका मजाक क्यों उड़ाया जाता है? रायपुर में कांग्रेस सही थी या दिल्ली में?”
उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि कांग्रेस हिंदू परंपराओं पर सवाल उठाती है, लेकिन महिलाओं को लेकर कुछ राजनीतिक और धार्मिक हस्तियों की विवादित टिप्पणियों पर चुप्पी साध लेती है।
भाजपा के शासन मॉडल की कांग्रेस से की तुलना
भाजपा की शासन व्यवस्था की तुलना कांग्रेस सरकारों से करते हुए त्रिवेदी ने नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाले गुजरात मॉडल, मध्य प्रदेश में कृषि संबंधी पहलों, कर्नाटक में किसानों को ब्याज मुक्त ऋण और उत्तर प्रदेश में पूर्व मुख्यमंत्रियों कल्याण सिंह तथा राजनाथ सिंह के कार्यकाल के दौरान कानून-व्यवस्था का उल्लेख किया।
उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकारों में अक्सर आंतरिक सत्ता संघर्ष देखने को मिलता है। इसके लिए उन्होंने छत्तीसगढ़ में भूपेश बघेल और टीएस सिंहदेव, राजस्थान में अशोक गहलोत और सचिन पायलट तथा कर्नाटक में सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के बीच राजनीतिक मतभेदों का उदाहरण दिया।
त्रिवेदी ने कहा कि भाजपा छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व वाली सरकार के विकास कार्यों को जनता तक पहुंचाना चाहती है। उन्होंने सरकार के ‘विश्वास का वर्ष’ और ‘निर्माण का वर्ष’ जैसे संकल्पों का भी उल्लेख किया।
उन्होंने तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, बिहार, गुजरात और ओडिशा सहित कई राज्यों में कांग्रेस के कमजोर होते चुनावी प्रदर्शन का हवाला देते हुए पार्टी की राजनीतिक स्थिति पर सवाल उठाए।
निर्वाचन आयोग की आलोचना को बताया चयनात्मक
त्रिवेदी ने निर्वाचन आयोग को लेकर कांग्रेस के रुख पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस उन चुनावी नतीजों को स्वीकार करती है, जिनमें उसे सफलता मिलती है, जबकि हारने पर चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाने लगती है।
उन्होंने कश्मीर, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, झारखंड, गुजरात, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, तेलंगाना, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु और असम में हुए चुनावों का उल्लेख करते हुए कांग्रेस पर निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगाया।
उन्होंने कई राज्यों में कांग्रेस के कमजोर चुनावी प्रदर्शन का जिक्र करते हुए सवाल किया कि जब पार्टी देश के बड़े हिस्से में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराने में संघर्ष कर रही है, तो वह संसद में बहुमत हासिल करने की उम्मीद कैसे कर सकती है?
श्रीलंका, नेपाल और बांग्लादेश जैसे पड़ोसी देशों में हुए राजनीतिक घटनाक्रमों का उल्लेख करते हुए त्रिवेदी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस भारत में अस्थिरता पैदा करने के प्रयासों के लिए विदेशों में हुए राजनीतिक उथल-पुथल से प्रेरणा ले रही है।
उन्होंने दावा किया कि ऐसे प्रयास सफल नहीं होंगे और जनता का समर्थन भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के साथ बना हुआ है।
त्रिवेदी ने कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत विकास की नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ रहा है, जबकि छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में आगे बढ़ रहा है। देश का विकास कुछ ताकतों को स्वीकार नहीं है और राहुल गांधी तथा कांग्रेस उनके हाथों का औजार बन गए हैं।”
प्रेस कॉन्फ्रेंस में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष किरण देव, प्रदेश महामंत्री अखिलेश सोनी, डॉ. नवीन मार्कंडेय, पूर्व विधायक शिवरतन शर्मा, प्रदेश उपाध्यक्ष नंदन जैन, मुख्य प्रदेश प्रवक्ता एवं सांसद संतोष पांडेय और प्रदेश मीडिया समन्वयक हेमंत पाणिग्रही उपस्थित थे।


