रायपुर, 31 अक्टूबर 2026
बैंक ऑफ बड़ौदा में 5.04 करोड़ रुपये के लोन घोटाले के मामले में आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा एवं एंटी करप्शन ब्यूरो (EOW-ACB) ने बड़ी कार्रवाई की है। एजेंसी ने शुक्रवार को बिलासपुर की विशेष अदालत में बैंक के पूर्व शाखा प्रबंधक और एक निजी सहयोगी के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है। दोनों पर फर्जी फर्मों के नाम पर लोन स्वीकृत कर बैंक को 5 करोड़ 4 लाख रुपये से अधिक का नुकसान पहुंचाने का आरोप है।

इस मामले में आरोपी राहुल कुमार सिन्हा (45) और बिस्वजीत भौमिक (56) हैं। भौमिक बिलासपुर के मोपका का निवासी है। वहीं, राहुल कुमार सिन्हा घटना के समय बिलासपुर के राजकिशोर नगर स्थित बैंक ऑफ बड़ौदा शाखा में वरिष्ठ शाखा प्रबंधक के पद पर पदस्थ था। वर्तमान में वह गुजरात के कच्छ जिले की गढ़सीसा शाखा में वरिष्ठ प्रबंधक के पद पर कार्यरत है।

28 जनवरी 2020 को दर्ज हुआ था मामला
EOW-ACB के अनुसार, इस मामले में अपराध क्रमांक 04/2020 के तहत 28 जनवरी 2020 को अपराध दर्ज किया गया था। बैंक के रायपुर स्थित क्षेत्रीय कार्यालय की शिकायत के आधार पर जांच शुरू की गई थी। जांच के बाद आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 420 (धोखाधड़ी), 467 (जालसाजी), 468 (धोखाधड़ी के उद्देश्य से जालसाजी), 471 (जाली दस्तावेज को असली बताकर इस्तेमाल करना) और 120-B (आपराधिक षड्यंत्र) के तहत आरोप लगाए गए हैं। इसके अलावा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 12 और 13(2) भी शामिल की गई है।
लोन दिलाने के नाम पर जुटाए दस्तावेज, फिर बनाई 11 फर्जी कंपनियां
जांच में सामने आया कि बिस्वजीत भौमिक बिलासपुर के जरहाभाठा में उड़ान माइक्रो फाइनेंस नाम से संस्था संचालित करता था। वह लोगों को छोटे लोन दिलाने में मदद करता था। इसी दौरान उसने आवेदकों से पहचान पत्र, संपत्ति से जुड़े दस्तावेज, हस्ताक्षर किए हुए खाली चेक और बैंक के फॉर्म एकत्र किए।
आरोप है कि भौमिक ने इन दस्तावेजों का आवेदकों की जानकारी और सहमति के बिना इस्तेमाल करते हुए 11 फर्जी फर्में तैयार कीं। इनमें से कुछ फर्मों में उसने अपने कर्मचारियों को प्रोपराइटर दर्शाया। वहीं, तीन फर्मों के लिए दुकान पंजीयन प्रमाणपत्र भी कथित तौर पर फर्जी तरीके से तैयार किए गए।
बैंकिंग नियमों को दरकिनार कर मंजूर किए गए लोन
जांच के मुताबिक, 20 मार्च 2018 से 3 मई 2019 के बीच तत्कालीन शाखा प्रबंधक राहुल कुमार सिन्हा ने कथित तौर पर बैंकिंग नियमों की अनदेखी करते हुए इन 11 अपात्र फर्मों को कैश क्रेडिट, ओवरड्राफ्ट, बैंक गारंटी और टर्म लोन की सुविधाएं मंजूर कीं।
आरोप है कि लोन के बदले ऐसी संपत्तियों को गिरवी रखा गया, जिनका संबंधित फर्मों से कोई संबंध नहीं था। इसके अलावा बैंक में फर्जी निरीक्षण रिपोर्ट भी प्रस्तुत की गईं, जिनमें ऐसे व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के मौजूद होने की पुष्टि की गई, जो वास्तव में अस्तित्व में ही नहीं थे। जांच में यह भी सामने आया कि एक फर्म का पता भौमिक के खुद के घर का था।
फर्जी बिलों के जरिए निजी फर्म तक पहुंचाई गई रकम
जांचकर्ताओं के अनुसार, 11 फर्मों के नाम पर स्वीकृत लोन की रकम अलग-अलग बैंक खातों के माध्यम से ट्रांसफर की गई। इसके बाद फर्जी बिलों का इस्तेमाल कर नेशनल स्मॉल इंडस्ट्रीज कॉरपोरेशन (NSIC) के जरिए रकम बिस्वजीत भौमिक की अपनी फर्म एबी फास्टनर्स (A.B. Fasteners) तक पहुंचाई गई।
वर्ष 2019 में सभी 11 लोन खाते नॉन परफॉर्मिंग एसेट्स (NPA) बन गए। इससे बैंक को कुल 5 करोड़ 4 लाख 15 हजार रुपये का नुकसान हुआ। मामले की जांच के बाद EOW-ACB ने दोनों आरोपियों के खिलाफ विशेष अदालत में चार्जशीट पेश कर दी है।


