2 Nov 2026, Mon
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महादेव सट्टा कांड का मास्टरमाइंड सौरभ चंद्राकर रायपुर आएगा: दिल्ली कोर्ट ने CBI को दी 2 दिन की ट्रांजिट रिमांड, 4 नवंबर तक पेशी

रायपुर, 2 नवंबर 2026। करीब 6 हजार करोड़ रुपए के महादेव ऑनलाइन सट्टा ऐप मामले के मुख्य आरोपी और प्रमोटर सौरभ चंद्राकर को अब छत्तीसगढ़ लाया जाएगा। ओमान से प्रत्यर्पण के बाद भारत पहुंचने पर सोमवार को उसे दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में पेश किया गया। कोर्ट ने CBI को सौरभ की 2 दिन की ट्रांजिट रिमांड दे दी है। साथ ही निर्देश दिया है कि आरोपी को 4 नवंबर 2026 या उससे पहले रायपुर की स्पेशल CBI कोर्ट में पेश किया जाए।

प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश निखिल चोपड़ा ने यह आदेश जारी किया। CBI की टीम मेडिकल जांच की प्रक्रिया पूरी करने के बाद सौरभ को रायपुर लेकर आएगी। यहां उससे महादेव सट्टा नेटवर्क और उससे जुड़े कथित आर्थिक एवं राजनीतिक गठजोड़ को लेकर पूछताछ की जाएगी।

116 दिन बाद ओमान से भारत लाया गया सौरभ

CBI के मुताबिक, महादेव सट्टा नेटवर्क की जांच शुरू होने के बाद से ही सौरभ चंद्राकर फरार था। वह वर्ष 2023 से दुबई में रह रहा था और उसके खिलाफ इंटरपोल का रेड कॉर्नर नोटिस जारी था। गिरफ्तारी से बचने के लिए उसने कथित तौर पर फर्जी पहचान दस्तावेजों का इस्तेमाल किया और UAE से ओमान पहुंच गया।

जांच एजेंसियों को उसके कथित फर्जी इंडोनेशियाई पासपोर्ट की जानकारी मिली थी। इसमें फोटो सौरभ की थी, लेकिन नाम ‘अजंता मेंडिस’ दर्ज था, जो श्रीलंका के पूर्व क्रिकेटर अजन्ता मेंडिस के नाम से मिलता-जुलता है। पासपोर्ट में जन्मतिथि भी दूसरे दस्तावेजों से अलग बताई गई थी।

खुफिया जानकारी और रेड कॉर्नर नोटिस के आधार पर 8 जुलाई 2026 को ओमान की रॉयल पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया था। इसके बाद CBI और ED ने भारत सरकार के माध्यम से ओमान को प्रत्यर्पण का औपचारिक प्रस्ताव भेजा और मामले से जुड़े सबूत सौंपे। लंबी प्रक्रिया के बाद प्रत्यर्पण को मंजूरी मिली और CBI की टीम 1 नवंबर को मस्कट पहुंचकर उसे भारत लेकर आई।

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CBI और ED दोनों कर रही हैं जांच

महादेव ऑनलाइन सट्टा ऐप से जुड़े मामलों की जांच CBI कर रही है। छत्तीसगढ़ सरकार ने इस मामले से संबंधित 13 FIR जांच के लिए CBI को सौंपी थीं। इनमें से दो मामलों में चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है। वहीं, प्रवर्तन निदेशालय (ED) मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से जांच कर रही है और सौरभ के खिलाफ अभियोजन शिकायत भी दाखिल कर चुकी है।

अब भारत आने के बाद पहले CBI उससे पूछताछ करेगी। इसके बाद ED भी अपनी जांच के सिलसिले में उसकी रिमांड मांग सकती है। दोनों एजेंसियां पहले से जुटाए गए सबूतों के आधार पर सट्टा नेटवर्क, पैसों के लेन-देन और विदेशों में मौजूद संपत्तियों से जुड़े सवाल पूछ सकती हैं।

सट्टा नेटवर्क के राजनीतिक कनेक्शन खुलने की उम्मीद

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सौरभ चंद्राकर की गिरफ्तारी पर CBI को बधाई दी है। उन्होंने कहा कि इस मामले में प्रोटेक्शन मनी किन-किन लोगों तक पहुंचती थी, इसका बड़ा खुलासा हो सकता है। सौरभ ने भी ओमान में भारतीय जांच एजेंसियों को महादेव सट्टा नेटवर्क के कथित राजनीतिक कनेक्शन, पैसों के लेन-देन और विदेशों में मौजूद संपत्तियों की जानकारी देने की बात कही थी।

उसने भारत आकर जांच एजेंसियों और कोर्ट के सामने बयान देने की तैयारी जताई थी। हालांकि, उसने अपनी और अपने परिवार की सुरक्षा की मांग भी की थी।

भारत आने से पहले जान का खतरा जताया था

ओमान में हिरासत के दौरान सौरभ चंद्राकर ने भारत की जेल में अपनी जान को खतरा होने की आशंका जताई थी। उसका दावा था कि महादेव सट्टा नेटवर्क से जुड़े प्रभावशाली लोग उसे और उसके परिवार को नुकसान पहुंचा सकते हैं। उसने पूछताछ के दौरान सुरक्षा देने और बिना किसी दबाव के अपना पक्ष रखने का अवसर देने की मांग की थी।

सौरभ ने नेटवर्क से जुड़े लोगों से अलग रखने की मांग भी की थी, ताकि वह जांच एजेंसियों के सामने स्वतंत्र रूप से बयान दे सके।

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देशभर में फैला था ऑनलाइन सट्टेबाजी का नेटवर्क

CBI की जांच के अनुसार, महादेव ऑनलाइन बुक देश के बड़े अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी नेटवर्क में शामिल था। इसका संचालन भारत के बाहर से किया जा रहा था। इस प्लेटफॉर्म के माध्यम से क्रिकेट, फुटबॉल, ताश और अन्य खेलों पर ऑनलाइन सट्टा लगाया जाता था।

नेटवर्क को देशभर में फ्रेंचाइजी की तर्ज पर पैनल और ब्रांच बनाकर संचालित किया जाता था। इनके जरिए लोगों को सट्टेबाजी से जोड़ा जाता था और उनसे रकम जमा कराई जाती थी। सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल पर इस नेटवर्क को बड़े स्तर पर संचालित करने का आरोप है।

हवाला के जरिए विदेश भेजी जाती थी सट्टे की रकम

जांच एजेंसियों के मुताबिक, सट्टेबाजी से मिलने वाली रकम कई बैंक खातों में जमा कराई जाती थी। अलग-अलग लेन-देन के जरिए पैसों को छिपाया जाता था और फिर हवाला के माध्यम से विदेश भेजा जाता था। CBI की जांच में नेटवर्क को बिना रुकावट चलाने के लिए सरकारी कर्मचारियों को रिश्वत दिए जाने की बात भी सामने आई है।

इस मामले में CBI ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, IPC की आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और जालसाजी से जुड़ी धाराओं के साथ छत्तीसगढ़ जुआ (प्रतिषेध) अधिनियम के तहत कार्रवाई की है। वहीं ED भारत और विदेशों में कई संपत्तियां अटैच कर चुकी है।

अब रायपुर में होगी आगे की पूछताछ

दिल्ली कोर्ट से ट्रांजिट रिमांड मिलने के बाद अब CBI की टीम सौरभ चंद्राकर को रायपुर लेकर आएगी। उसे 4 नवंबर तक स्पेशल CBI कोर्ट में पेश किया जाना है। इसके बाद कोर्ट के आदेश के अनुसार आगे की पूछताछ और कानूनी कार्रवाई होगी। महादेव सट्टा मामले में सौरभ की गिरफ्तारी को जांच एजेंसियों के लिए बड़ी कामयाबी माना जा रहा है।

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