6 Nov 2026, Fri
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छत्तीसगढ़ में 3,500 CHOs ने स्वास्थ्य भवन घेरने निकाली रैली: पुलिस ने दो जगह रोका रास्ता, 7 महीने का इंसेंटिव अटका

 

नवा रायपुर, 06 नवंबर। छत्तीसगढ़ में अपनी पांच सूत्रीय मांगों को लेकर 3,500 से अधिक सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों (CHOs) ने गुरुवार को स्वास्थ्य भवन का घेराव करने का प्रयास किया। छत्तीसगढ़ प्रदेश सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी संघ के आह्वान पर प्रदेशभर के विभिन्न जिलों से पहुंचे अधिकारी तूता धरना स्थल से रैली निकालकर राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन कार्यालय स्थित स्वास्थ्य भवन की ओर रवाना हुए। हालांकि, पुलिस प्रशासन ने रास्ते में बैरिकेडिंग कर प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोक दिया।

प्रदर्शनकारी जब स्वास्थ्य भवन के मुख्य द्वार पर पहुंचे, तो पुलिस ने उन्हें वहां रोक दिया। इसके बाद CHOs ने आगे बढ़ने का प्रयास किया, लेकिन मेन रोड अंडरब्रिज के पास भी बैरिकेडिंग कर उनका रास्ता बंद कर दिया गया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांगों के समर्थन में जमकर नारेबाजी की और शासन तथा राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जताई।

7-8 महीने से प्रोत्साहन राशि का भुगतान लंबित

संघ का आरोप है कि प्रदेश के सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों को अपनी प्रोत्साहन राशि के भुगतान के लिए पिछले 3-4 वर्षों से लगातार आंदोलन करना पड़ रहा है। राज्य कार्यालय की ओर से हर महीने की 10 तारीख तक प्रोत्साहन राशि के सत्यापन और भुगतान के निर्देश जारी किए जाते हैं, लेकिन जिला और ब्लॉक स्तर पर इनका पालन नहीं हो रहा है। इसके चलते पिछले 7-8 महीनों की प्रोत्साहन राशि अब तक लंबित है।

संघ ने इंसेंटिव घोटाले के नाम पर केवल CHOs को निशाना बनाकर कार्रवाई किए जाने पर भी आपत्ति जताई है। अधिकारियों का कहना है कि प्रोत्साहन राशि संस्थागत प्रदर्शन और स्वास्थ्य संकेतकों के आधार पर निर्धारित होती है। ऐसे में किसी भी गड़बड़ी की जांच में संबंधित स्वास्थ्य संस्था के सभी कर्मचारियों की भूमिका और कार्य-विभाजन को शामिल किया जाना चाहिए।

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अतिरिक्त काम और नौकरी से हटाने की धमकियों से नाराजगी

CHOs का कहना है कि उप स्वास्थ्य केंद्रों में ऑनलाइन एंट्री और विभिन्न स्वास्थ्य कार्यक्रमों से जुड़े अतिरिक्त कामों का बोझ भी उन्हीं पर डाला जा रहा है। कार्य-दायित्वों (TOR) स्पष्ट नहीं होने के कारण अधिकारियों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं, अलग-अलग जिलों में नौकरी से निकालने की धमकियां दिए जाने से भी नाराजगी बढ़ रही है।

ये हैं संघ की 5 प्रमुख मांगें

  1. इंसेंटिव घोटाले के नाम पर केवल CHOs के खिलाफ जारी अनुचित आदेश निरस्त या संशोधित किए जाएं और 7-8 महीने की लंबित प्रोत्साहन राशि का भुगतान हो।
  2. प्रोत्साहन राशि को सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों के मूल वेतन में समायोजित किया जाए।
  3. उप स्वास्थ्य केंद्रों में पदस्थ सभी कर्मचारियों के कार्य-दायित्वों (TOR) का पुनरीक्षण कर स्पष्ट और न्यायसंगत कार्य-विभाजन किया जाए।
  4. सुकमा जिले में PLP पोर्टल पर सत्यापन के बाद निर्धारित ग्रेड के विपरीत किए गए भुगतान की जांच हो, दोषियों पर कार्रवाई की जाए और अंतर की राशि का भुगतान किया जाए।
  5. हर महीने की 10 तारीख तक प्रोत्साहन राशि का सत्यापन और भुगतान नहीं करने वाले जिला एवं ब्लॉक स्तर के जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय कर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए।

ज्ञापन सौंपा, अब अनिश्चितकालीन आंदोलन की चेतावनी

प्रदर्शन के बाद संघ ने आयुक्त सह मिशन संचालक, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन छत्तीसगढ़ को पांच सूत्रीय मांगों का ज्ञापन सौंपा। संघ ने चेतावनी दी है कि यदि मांगों पर तत्काल ठोस निर्णय लेकर उनका निराकरण नहीं किया गया, तो प्रदेशभर में अनिश्चितकालीन आंदोलन शुरू किया जाएगा।

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संघ के प्रदेश अध्यक्ष प्रफुल्ल कुमार ने कहा कि अब केवल आश्वासन से काम नहीं चलेगा। मांगों का लिखित और समयबद्ध निराकरण होना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रदेश के सभी सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी अपने अधिकारों और सम्मान की लड़ाई के लिए एकजुट हैं और इसे निर्णायक अंजाम तक पहुंचाएंगे।

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