7 Mar 2026, Sat

भारतीय तकनीक के विकास से ही विकसित होगा भारत : कुलपति प्रो. झा


प्रमोद मिश्रा
भिलाई, 01 मार्च 2024।श्री शंकराचार्य प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी, भिलाई के साइंस अध्ययन विभाग द्वारा राष्ट्रीय विज्ञान दिवस 28 फरवरी के अवसर पर स्वदेशी तकनीक- विकसित भारत@2047 विषय पर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन किया गया. आयोजन के पहले दिन मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. रजनीकांत शर्मा-वैज्ञानिक-सी सेंट्रल वाटर बोर्ड, जलशक्ति मंत्रालय, रायपुर उपस्थित रहें. कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रो. (डॉ.) ए.के. झा कुलपति ने की. अतिविशिष्ट अतिथि के रूप में श्री पी. के. मिश्रा, कुलसचिव एवं प्रो. (डॉ.) सुशीलचंद्र तिवारी,  डायरेक्टर, यूनिवर्सिटी की गरिमामई उपस्थिति रही. इस अवसर पर मुख्य अतिथि डॉ. रजनीकांत शर्मा वाटर फूट प्रिंट के विषय में पीपीटी के माध्यम से बताया कि प्रतिदिन हम जितना पानी इस्तेमाल करते हैं उसका कुछ हिस्सा विजिबल वाटर यानि दिखाई देने वाला पानी होता है यानी कि वो हिस्सा, जो हम पीते हैं, नहाते हैं या कार, बर्तन या कपड़े धोने में इस्तेमाल करते हैं। जो कुछ भी हम खाते हैं या इस्तेमाल करते हैं, एक कप कॉफी से लेकर पूरे खाने तक, कपड़े जो हम पहनते हैं उनसे लेकर हमारे सेलफोन तक-सब कुछ बनाने में पानी की जरूरत पड़ती है. इसी को वर्चुअल वाटर यानि अप्रत्यक्ष जल कहते हैं। हो सकता है कि हम वर्चुअल वाटर का इस्तेमाल सीधे तौर पर ना कर रहे हो, लेकिन कहीं ना कहीं इन चीजों को बनाने में पानी का इस्तेमाल हुआ है। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहें कुलपति डॉ. झा ने अपने उद्बोधन में कहा कि राष्ट्रीय विज्ञान दिवस का अद्भूत पहलु यह है कि यह लोगों को समझाता है कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी क्षेत्र में हो रहे नए और उन्नत विकासों का सीधा संबंध उनके दैहिक और सामाजिक जीवन से कैसे है. यह लोगों को विज्ञान की दुनिया के साथ जोड़ने में मदद करता है और उन्हें इसमें रुचि बढ़ाने के लिए प्रेरित करता है. उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय विज्ञान दिवस भारत में विज्ञान और प्रौद्योगिकी को महत्वपूर्णता देने और लोगों को इसके प्रति जागरूक करने का एक महत्वपूर्ण और आवश्यक दिन है. यह एक सामाजिक और शैक्षिक घटना है जो विज्ञान में रुचि बढ़ाने के लिए लोगों को मिलकर उत्साहित करती है और उन्हें विज्ञानिक सोच और अनुसंधान के प्रति आत्मनिर्भर बनाती है। अतिविशिष्ट अतिथि कुलसचिव पी.के. मिश्रा ने कहा कि वर्ष 2024 के राष्ट्रीय विज्ञान दिवस की थीम विकसित भारत के लिए स्वदेशी तकनीक देश के अमृत काल के दृष्टिकोण की ओर भी ध्यान दिलाता है. तो विकसित भारत@2047 जो भारत को आत्मनिर्भर बनाने में विज्ञान के महत्व पर भी बल भी देता है. इस दिवस को मनाने का मूल उद्देश्य विद्यार्थियों को विज्ञान के प्रति आकर्षित करना विज्ञान के क्षेत्र में नए प्रयोग के प्रति सजग बनाना उन्हें जिज्ञासु बनाना तथा हमारे देश के अपने वैज्ञानिकों के खोजो अविष्कारों तथा उनकी बौद्धिक क्षमताओं के बारे में जानने के लिए जागरूक करना है. प्रो. (डॉ.) सुशीलचंद्र तिवारी,  डायरेक्टर, यूनिवर्सिटी ने अपने उद्बोधन में कहा कि राष्ट्रीय विज्ञान दिवस भारत में विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में रुचि बढ़ाने और योगदान करने का एक महत्वपूर्ण मौका है। इस दिन के माध्यम से विभिन्न क्षेत्रों में काम कर रहे वैज्ञानिकों को सम्मानित किया जाता है और लोगों को विज्ञान में रुचि बढ़ाने के लिए प्रेरित किया जाता है। प्रो. तिवारी ने कहा कि कहा कि हमारे जीवन में विज्ञान के महत्व को पहचानने और भावी पीढ़ियों को विज्ञान अपनाने और देश के विकास में योगदान देने के लिए प्रेरित करने का दिन है. उन्होंने कहा कि दरअसल विज्ञान और प्रौद्योगिकी का मूलभूत सिद्धान्त समस्यामूलक तकनीकी का विकास और उपयोग करना है. इस अवसर पर छात्राओं के लिए पोस्टर प्रदर्शनी, साइंटिफिक मॉडल प्रदर्शनी का आयोजन किया जिसमें यूनिवर्सिटी के इतर अन्य विद्यालयों, महाविद्यालयों से बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने भाग लिया। उक्त कार्यक्रम का संयोजन डॉ. प्राची निमजे, अधिष्ठाता छात्र कल्याण एवं बेसिक साइंस के प्राध्यापकों द्वारा किया गया. कार्यक्रम का संचालन डॉ. परख सहगल , सहायक प्राध्यापक, लाइफ साइंस विभाग एवं पूजा, सौम्य, छात्रा बीएससी बायोटेक्नोलॉजी ने किया। आभार प्रदर्शन प्रो. डॉ. संदीप श्रीवास्तव ने की. इस अवसर पर यूनिवर्सिटी परिवार के विद्यार्थियों, प्राध्यापकों कर्मचारियों-अधिकारियों एवं अन्य दुसरे विद्यालयों एवं महाविद्यालयों विद्यार्थियो व प्राध्यापकों की गरिमामई उपस्थिति रहीं.

                                                                                      

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