प्रमोद मिश्रा
रायपुर, 1 जुलाई 2025

छत्तीसगढ़ के शिक्षक एक बार फिर अपनी मांगों को लेकर आंदोलन के मोर्चे पर उतरने को तैयार हैं। शिक्षक साझा मंच छत्तीसगढ़ के नेतृत्व में प्रदेश के 146 विकासखंडों में शिक्षक मंगलवार को हड़ताल पर रहेंगे। स्कूलों से बाहर आकर वे सड़कों पर प्रदर्शन करेंगे और सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी करते हुए अपनी आवाज बुलंद करेंगे।
एकजुट हुए 23 शिक्षक संगठन
इस बार प्रदेश के 23 शिक्षक संगठनों ने एक मंच पर आकर साझा मंच का गठन किया है और मिलकर आंदोलन का ऐलान किया है। इससे करीब 1.80 लाख शिक्षक हड़ताल में शामिल हो रहे हैं। इससे पहले भी 15 से 30 जून तक शिक्षक काली पट्टी लगाकर विरोध जताते रहे हैं।
यह हैं प्रमुख मांगे:
- सोना साहू के तर्ज पर सभी शिक्षकों को क्रमोन्नति वेतनमान और एरियर्स का लाभ मिले।
- 1995 और 1998 में नियुक्त शिक्षकों की सेवा गणना प्रथम नियुक्ति तिथि से हो, न कि 2018 से।
- पुरानी पेंशन योजना बहाल की जाए।
- डीएड धारक शिक्षकों को व्याख्याता व प्राचार्य के पदों पर पदोन्नति मिले।
- युक्तियुक्तिकरण रद्द कर 2008 के सेटअप को लागू किया जाए।
आंदोलन का नेतृत्व कर रहे प्रमुख पदाधिकारी
संजय शर्मा, मनीष मिश्रा, केदार जैन, वीरेंद्र दुबे, विकास राजपूत, जाकेश साहू, कृष्णकुमार नवरंग, राजनारायण द्विवेदी, भूपेंद्र बनाफर, शंकर साहू, प्रदीप लहरे, राजकिशोर तिवारी, विक्रम राय, चेतन बघेल समेत अन्य शिक्षक नेता शामिल हैं।
आरोप: सरकार नहीं दे रही समानता का लाभ
शिक्षकों का कहना है कि सूरजपुर की शिक्षिका सोना साहू को हाईकोर्ट के आदेश पर क्रमोन्नति वेतनमान और एरियर्स मिला, लेकिन राज्य सरकार जनरल ऑर्डर जारी नहीं कर रही, जिससे प्रदेशभर के 1 लाख से अधिक शिक्षक प्रभावित हैं। हर माह उन्हें 15 से 20 हजार रुपये तक का नुकसान हो रहा है।
शिक्षकों की चेतावनी
साझा मंच ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने उनकी मांगों को हल्के में लिया तो आगे समस्त स्कूलों में तालेबंदी कर दी जाएगी और अनिश्चितकालीन हड़ताल की शुरुआत होगी। इसकी पूरी जिम्मेदारी राज्य सरकार की होगी।
छत्तीसगढ़ में यह आंदोलन शिक्षा व्यवस्था को प्रभावित कर सकता है। सरकार के लिए यह बड़ा संकट बन सकता है, खासकर तब जब इतने बड़े पैमाने पर शिक्षक एकजुट होकर प्रदर्शन कर रहे हैं।





