मीडिया 24 डेस्क
अंबिकापुर, 3 जुलाई 2025

छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर में साइबर ठगों ने बेहद शातिर तरीके से CRPF के एसआई को ठगी का शिकार बना डाला। खुद को टेलीकॉम विभाग और दिल्ली पुलिस अधिकारी बताकर एक फर्जी गैंग ने एसआई आर. महेन्द्रन से कुल 22 लाख रुपये वसूल लिए। इस दौरान पीड़ित एसआई ने अपनी पत्नी के जेवर गिरवी रखे, बच्चे की एफडी तक तोड़ दी और 17 दिन तक साइबर गैंग के चंगुल में फंसा रहा, जिसे ठगों ने ‘डिजिटल अरेस्ट’ का नाम दिया।
कैसे हुई ठगी?
5 जून की सुबह 9.30 बजे आर. महेन्द्रन के पास एक अनजान कॉल आया। कॉलर ने खुद को रविशंकर बताया और कहा कि वह टेलीकॉम विभाग, भारत सरकार दिल्ली से बात कर रहा है। उसने आरोप लगाया कि उनके आधार कार्ड से जुड़े सिम का इस्तेमाल आपराधिक गतिविधियों में हो रहा है। कुछ ही देर में दूसरा कॉल आया, जिसमें वीडियो कॉल पर एक व्यक्ति पुलिस वर्दी में नजर आया और खुद को दिल्ली पुलिस का अफसर बताया।
फर्जी अफसरों ने दावा किया कि महेन्द्रन के नाम से दिल्ली में एक बैंक अकाउंट खोला गया है जिसमें 2 करोड़ का लेन-देन हुआ है और एक आरोपी पकड़ा गया है, जिसने उनका नाम लिया है।
धीरे-धीरे ठगी की गई भारी रकम
‘वेरिफिकेशन’ के नाम पर अलग-अलग बैंक खातों में पैसे ट्रांसफर करने को कहा गया।
- 6 जून को ₹49,999
- खाते में मौजूद ₹2.58 लाख ट्रांसफर कराए गए
- फिर डर दिखाकर 10 लाख रुपये की मांग की गई
- पत्नी के जेवर गिरवी रखकर लोन लिया गया
- 11 जून को बच्चे की FD तोड़कर ₹5.01 लाख और ट्रांसफर किए गए
17 दिन तक रहा ‘डिजिटल अरेस्ट’
ठगों ने धमकी दी कि परिवार को खतरा है, बात लीक न हो, हर घंटे व्हाट्सएप पर रिपोर्ट दो – इस डर से एसआई पूरे 17 दिन तक उनका मानसिक और डिजिटल बंदी बना रहा।
FIR दर्ज, जांच शुरू
17 दिन बीतने के बाद जब कॉल्स बंद हो गए और मोबाइल बंद बताने लगे, तब जाकर एसआई को ठगी का अहसास हुआ और उसने गांधीनगर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई।
थाना प्रभारी का बयान
“गांधीनगर थाने में आर. महेन्द्रन ने 6 जून से 23 जून के बीच करीब 22 लाख की ठगी की शिकायत दर्ज कराई है। हमने IPC की धारा 66(D) और 118(4) के तहत मामला दर्ज कर लिया है। आगे वैधानिक कार्रवाई जारी है।”





