7 Mar 2026, Sat

बस्तर में ढोल-मांदर की थाप के साथ लौट रही शांति : मार्च 2026 तक नक्सलमुक्त बस्तर का संकल्प, मुख्यमंत्री बोले– नक्सल के ताबूत में ठोंक दी अंतिम कील

प्रमोद मिश्रा

रायपुर, 08 जुलाई 2025

छत्तीसगढ़, जो अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, घने वन क्षेत्र और विविध जनजातीय समुदायों के लिए जाना जाता है, लंबे समय से नक्सलवाद की चुनौती से जूझता रहा है। बस्तर के विकास में बाधक रहे नक्सलवाद के अब यहां से नक्सल उन्मूलन की अंतिम लड़ाई जारी है। बस्तर संभाग अपनी कला एवं संस्कृति के लिए विशिष्ट पहचान रखता है। अकेले बस्तर संभाग में ही हल्बी, गोड़ी, भतरी, दोलरी जैसे पारंपरिक बोली, बोली जाती है। वर्षों से अशांत रहे बस्तर अंचल में ढोल और मांदर की थाप अब फिर से सुनाई देने लगेगी। मार्च 2026 तक बस्तर को नक्सल मुक्त बनाने का संकल्प छत्तीसगढ़ सरकार ने लिया है। सटीक रणनीति के साथ यहां आतंक के खात्मे और सामाजिक-आर्थिक विकास के काम हो रहे हैं। बस्तर ओलंपिक और बस्तर पंडुम जैसे आयोजनों में जिस तरह लोगों ने भागीदारी की, वो इस बात का प्रमाण है कि बस्तर में अब शांति स्थापित हो रही है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का मानना है कि ‘‘लाल आतंक के खात्मे के लिए नक्सलियों के खिलाफ हमारी निर्णायक लड़ाई जोर शोर से जारी है। इसका परिणाम है कि नक्सलियों की कमर अब टूट गई है। प्रदेश से जब तक नक्सली हिंसा और उग्रवाद का अंत नहीं हो जाता हम चुप नहीं बैठेंगे।’’

केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह 22 जून 2025 को छत्तीसगढ़ प्रवास पर आए थे। इस दौरान उन्होंने कहा कि बारिश के मौसम में आराम करने वाले नक्सली इस बरसात में चैन की नींद नहीं सो पाएंगे। सुरक्षा बलों द्वारा नक्सल ऑपरेशन जारी रहेगा।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद अब अपनी अंतिम सांसें गिन रहा है। उन्होंने कहा कि सुरक्षाबलों के वीर जवान कठिन चुनौतियों और दुर्गम परिस्थितियों के बावजूद नक्सलवाद के खात्मे के अभियान को ऐतिहासिक सफलता की ओर ले जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमारे जवानों का अद्वितीय साहस और बलिदान न केवल हमारे जवानों की कर्तव्यनिष्ठा को प्रदर्शित करता है, बल्कि पूरे देश को एक सकारात्मक संदेश भी देता है कि हमारा देश अब नक्सलवाद की बेड़ियों से मुक्त होने की ओर अग्रसर है।

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छत्तीसगढ़ में बीते 21 मई 2025 को माओवादी सरगना बसव राजू के साथ अबूझमाड़ के जंगल में 26 नक्सलियों को सुरक्षा बल के जवानों के हाथों मारे जाने से नक्सलवाद की कमर टूटी है। इस पर सवा 3 करोड़ का ईनाम घोषित था। तीन दशकों में पहली बार हुआ है कि जनरल सेक्रेटरी रैंक का कोई माओवादी न्यूट्रलाइज किया गया। यह असाधारण कामयाबी है और इस बात का स्पष्ट संकेत है कि नक्सल के ताबूत में हमने अंतिम कील जड़ दिया है। इसके अलावा शीर्ष ईनामी नक्सली लक्ष्मी नरसिम्हा चालम उर्फ सुधाकर भी 05 जून 2025 को नेशनल पार्क एरिया में पुलिस मुठभेड़ में ढेर किया गया, इस पर 1 करोड़ का ईनाम था।

नियद नेल्ला नार (आपका अच्छा गांव) योजना नक्सल प्रभावित इलाकों में गेम चेन्जर्स साबित हो रही है। माओवाद प्रभावित क्षेत्रों में स्थापित नए कैम्पों के आसपास के 5 किलोमीटर के दायरे में आने वाले गांवों एवं ग्रामीणों को 17 विभागों की 59 हितग्राहीमूलक योजनाओं और 28 सामुदायिक सुविधाओं के तहत आवास, अस्पताल, पानी, बिजली, पुल-पुलिया, स्कूल इत्यादि मूलभूत संसाधन उपलब्ध कराए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री की पहल पर छत्तीसगढ़ के माओवादी आतंक प्रभावित जिलों के विद्यार्थियों को तकनीकी एवं व्यावसायिक शिक्षा के लिए ब्याज रहित ऋण मिलेगा।

प्रदेश में पिछले डेढ़ साल के भीतर सुरक्षाबलों ने अपनी बहादुरी से 438 नक्सलियों को मार गिराया है। साथ ही 1515 नक्सलियों को गिरफ्तार किया और 1476 नक्सलियों को आत्मसमर्पण करने पर विवश किया है। नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई में हमारे सुरक्षा बल महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। इन कैंपों के माध्यम से हमारी सरकार अंदरूनी गांवों तक सुरक्षा के साथ-साथ केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं की पहुंच भी सुनिश्चित करने में सफल हो रही है।

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आखिर क्यों खास है पूवर्ती गांव

सुकमा जिले के अंदरूनी व अतिसंवेदनशील क्षेत्र में बसा हुआ पूवर्ती गांव एक वक्त नक्सलियों का सबसे सुरक्षित ठिकाना हुआ करता था। एक करोड़ रूपए का ईनामी नक्सली हिड़मा तथा टेकलगुड़ा कैंप निर्माण के दौरान नक्सली हमले की घटना का मास्टरमाइंड देवा का यह पैतृक गांव होने के कारण हमेशा चर्चा में रहा है। माओवादियों के प्रभाव में होने के कारण पूवर्ती गांव में शासन की योजनाएं नहीं पहुंच पा रही थीं, लेकिन अब इस गांव में सुरक्षा कैम्प खुलने से यहां के लोगों को तेजी से मूलभूत सुविधाएं सुलभ होने लगी हैं।

आदिवासी बाहुल्य आबादी, अनुपम नैसर्गिक सुंदरता और प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर बस्तर में आज विकास का सबसे बड़ा अवरोधक है नक्सली हिंसा। पिछले 3 दशकों में नक्सलियों ने यहां अपने पैर पसारे। बंदूक के दम पर हिंसा के साथ विकास कार्यों में बाधा पहुंचाई। नक्सलियों ने अपने झूठे, खोखले सिद्धांतों के जरिए लंबे समय तक भोले-भाले आदिवासियों को भ्रम में डाला, हिंसा का सहारा लेकर उन्हें डराने की कोशिश की। बच्चों से उनके स्कूल छीने, उनका बचपन छीना, उन्हें हिंसा की राह पर धकेला। कई परिवारों को बर्बाद किया, सुहागनों की सिंदूर उजाड़े, बेटियों को अगवा किया और उन्हें भी हिंसा के रास्ते पर ले गए। इसी वजह से संसाधनों से परिपूर्ण बस्तर पर देश के सबसे पिछड़े इलाकों में एक होने का धब्बा लगा। लेकिन अब छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व वाली सरकार दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ विकास के इस अवरोध को पूरी तरह से समाप्त करने पर डटी हुई है।

बस्तर में विकास का अब नया सबेरा होने वाला है। यहां नक्सलियों की कमर टूट चुकी है। लोगों को अब खुशहाल बस्तर मिलेगा। पुलिस और सुरक्षाबलों के जवान पूरे हौंसले के साथ नक्सल मोर्चे पर डटे हैं और अब जल्द ही नक्सलियों का समूल अंत होगा।

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By Desk

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