प्रमोद मिश्रा
बलौदाबाजार, 08 अगस्त 2025

जिले के नयापारा डमरू गांव में एक बार फिर धर्म परिवर्तन का प्रयास सामने आया है। जानकारी के अनुसार, कोरदा लवन निवासी श्यामलाल रात्रे ने चंपाबाई नामक महिला को आंखों की रोशनी लौटाने के नाम पर ईसाई धर्म अपनाने के लिए प्रेरित किया। लेकिन जैसे ही इस घटना की भनक विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं को लगी, वे तुरंत सक्रिय हो गए और चंपाबाई के घर पहुंचकर गैर-हिंदू पद्धति से हो रही प्रार्थना को रुकवाया।
बजरंग दल कार्यकर्ताओं ने श्यामलाल रात्रे को गांव में दोबारा न आने की चेतावनी दी और ग्रामीणों को धर्मांतरण से सतर्क रहने की समझाइश दी। चंपाबाई के घर से हटाई गई तुलसी के पौधे की पुनः विधिवत पूजा कर स्थापना की गई और पूरे घर में रामनाम का जाप और लेखन कराया गया। परिवार को रक्षासूत्र बांधकर संगठन की ओर से हरसंभव मदद का वचन भी दिया गया।
चंपाबाई ने सुनाई आपबीती
चंपाबाई ने बताया कि चार साल पहले रसेड़ी में एक रिश्तेदार के घर गई थीं, जहां श्यामलाल रात्रे ने उन्हें ईसा मसीह की प्रार्थना से आंखों की रोशनी लौटाने का झांसा दिया। पिता के विरोध के बावजूद उन्होंने घर से भगवान और तुलसी को बाहर कर दिया। लेकिन उनकी आंखों की हालत और बिगड़ गई और अब पूरी तरह से दिखना बंद हो गया है। उन्होंने कहा, “अब मैं अपने भगवान को ही मानूंगी।”
विहिप ने जताई कड़ी आपत्ति
विहिप जिलाध्यक्ष अभिषेक तिवारी मिकी ने कहा कि दो साल पहले भी इसी व्यक्ति ने चंपाबाई का धर्म परिवर्तन कराया था, जिसे संगठन ने प्रयास कर वापस सनातन में लौटाया। उन्होंने कहा कि अशिक्षा, बीमारी और गरीबी का फायदा उठाकर भोलेभाले ग्रामीणों का धर्मांतरण कराया जा रहा है, जो अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। संगठन ने चंपाबाई को विशेषज्ञ डॉक्टर से इलाज कराने की भी व्यवस्था की है।
सरकार पर भी उठाए सवाल
विहिप ने आरोप लगाया कि प्रदेश में भाजपा की सरकार धर्मांतरण रोकने के वादे पर बनी थी लेकिन अभी तक केवल बयानबाजी हो रही है। विहिप ने मांग की है कि धर्मांतरण रोकने के लिए सख्त कानून लागू किया जाए और जो लोग धर्म बदल चुके हैं, उनकी डीलिस्टिंग कर आरक्षण से वंचित किया जाए।
घटना के समय मौजूद थे
राजेंद्र जायसवाल, आदित्य यदु, आनंद साहू, सालिक राम पाल, महेश पाल, गोविंद गिरी गोस्वामी, यंगम साहू, मुकेश पाल, ओमप्रकाश साहू, लुकेश पाल, मनीष पाल, टिकेश्वर पटेल, रविंद्र विश्वकर्मा सहित कई ग्रामीण।





