प्रमोद मिश्रा
रायपुर, 12 अगस्त 2025

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर स्थित जैनम् मानस भवन में सहकार भारती बुनकर प्रकोष्ठ का प्रथम राष्ट्रीय अधिवेशन 23 और 24 अगस्त 2025 को आयोजित होगा। इसमें देशभर से 1000 से अधिक चुनिंदा सहकारी बुनकर प्रतिनिधि शामिल होंगे और बुनकरी क्षेत्र में नवीनतम नवाचार, चुनौतियां और संभावनाओं पर मंथन करेंगे।
सहकार भारती के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. उदय जोशी ने बताया कि संयुक्त राष्ट्र महासभा ने वर्ष 2025 को ‘अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता वर्ष’ घोषित किया है। सहकार भारती देश का एकमात्र स्वयंसेवी संगठन है, जो ‘बिना संस्कार नहीं सहकार, बिना सहकार नहीं उद्धार’ के ध्येय के साथ 28 राज्यों के 650 से अधिक जिलों में सक्रिय है। हाल के वर्षों में संगठन के विभिन्न प्रकोष्ठों के राष्ट्रीय अधिवेशन आईटी, मत्स्य, महिला सहकारिता, डेयरी, एफपीओ आदि क्षेत्रों में सफलतापूर्वक संपन्न हो चुके हैं।
भारत की बुनकरी परंपरा के संरक्षण और बुनकरों की आर्थिक स्थिति सुधारने के उद्देश्य से यह अधिवेशन आयोजित हो रहा है। इसमें बुनकर आयोग के गठन, ‘वोकल फॉर लोकल’ अभियान, डिजिटल मार्केटिंग, ई-कॉमर्स, सरकारी योजनाओं के लाभ और बाजार तक सीधी पहुंच जैसे मुद्दों पर विशेषज्ञ मार्गदर्शन देंगे।
अधिवेशन में केंद्रीय कपड़ा मंत्री गिरिराज सिंह, केंद्रीय एमएसएमई मंत्री जीतनराम मांझी, राज्यपाल रमेन डेका, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह और सहकारिता मंत्री केदार कश्यप विशेष अतिथि होंगे। साथ ही केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह के आने की भी संभावना है।
अधिवेशन की तैयारी के लिए प्रदेश महामंत्री कनिराम, संयोजक सुरेन्द्र पाटनी, सह संयोजक पुरुषोत्तम देवांगन, कार्यालय मंत्री सौरभ शर्मा और व्यवस्था प्रमुख अजय अग्रवाल के नेतृत्व में टीम गठित की गई है।
सहकार भारती का मानना है कि हस्तकरघा केवल रोजगार का साधन नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक पहचान है। सही दिशा और संसाधन मिलने पर यह न केवल लाखों बुनकर परिवारों को आत्मनिर्भर बना सकता है, बल्कि देश की सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक स्तर पर सशक्त कर सकता है।





