राजिम, 16 अगस्त 2025
जन्माष्टमी का पर्व भक्ति, उल्लास और आनंद का प्रतीक है। भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव पर श्रद्धा और विधि-विधान से पूजन करने पर भक्तों की हर मनोकामना पूर्ण होती है। यह कहना है भागवताचार्य पंडित विकास मिश्रा का।

पंडित मिश्रा ने बताया कि जन्माष्टमी के दिन प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूजन स्थल को गंगाजल से शुद्ध कर सजाएँ और बालकृष्ण को झूले में विराजमान करें। दूध, दही, मक्खन, मिश्री, फल, पुष्प और तुलसी पत्र अर्पित करना विशेष रूप से शुभ माना जाता है। रात्रि 12 बजे पंचामृत से भगवान का अभिषेक, 108 नामों का जाप और आरती करने से अपार पुण्य की प्राप्ति होती है।
मनोकामना पूर्ण करने के उपाय बताते हुए पंडित मिश्रा ने कहा कि जन्माष्टमी की रात तुलसी दल के साथ मक्खन अर्पित कर “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जप करना अत्यंत फलदायी है। इसके अलावा दीपक जलाकर सात बार भगवान के चारों ओर घुमाना भी शुभ माना गया है।
उन्होंने कहा – “जन्माष्टमी केवल श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव नहीं, बल्कि जीवन को धर्म, सदाचार और सकारात्मकता से भरने का श्रेष्ठ अवसर है।”
भक्तों की आस्था के अनुसार यह पर्व केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि जीवन में प्रेम, सत्य और भक्ति का संदेश देने वाला उत्सव है।





