राजिम, 26 अगस्त 2025
भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी के अवसर पर इस वर्ष गणेशोत्सव 26 अगस्त दोपहर 1:54 बजे से 27 अगस्त दोपहर 3:44 बजे तक मनाया जा रहा है। गणेश पूजन का अनिवार्य समय मध्याह्न 11:05 बजे से 1:40 बजे तक निर्धारित रहा। इसी अवधि में भद्रा काल (सुबह 2:46 से दोपहर 3:44 बजे तक) होने के कारण श्रद्धालुओं में संशय की स्थिति बनी।

भागवताचार्य पंडित विकास मिश्रा ने इस विषय पर स्पष्ट किया कि भद्रा दोष केवल सांसारिक कार्यों जैसे विवाह, यात्रा, गृहप्रवेश आदि पर लागू होता है, देव पूजा पर नहीं। उन्होंने निर्णयसिन्धु ग्रंथ का उल्लेख करते हुए कहा –
“देवपूजादिकं कार्यं भद्रायां न निषिध्यते”
अर्थात् देव स्थापना, जप, तप, होम, दान आदि कार्य भद्रा काल में भी पूर्णतः मान्य और फलदायी हैं।
पंडित मिश्रा ने बताया कि गणेश चतुर्थी पूजन का विधान ही है – “मध्याह्ने श्रीगणेशं सम्पूज्येत्” यानी गणपति की मध्याह्न पूजा ही शास्त्रसम्मत है। अतः इस वर्ष भद्रा काल में भी गणेश स्थापना करना पूर्णतः उचित और पुण्यकारी है।
विशेष कामनाओं हेतु अर्पण
पंडित मिश्रा ने श्रद्धालुओं को बताया कि गणेश चतुर्थी पर विशेष कामनाओं के लिए निम्न अर्पण करना लाभकारी होता है –
- धन-समृद्धि हेतु – दूर्वा और गुड़ चढ़ाएँ।
- विद्या व सफलता हेतु – लाल पुष्प और मोदक अर्पित करें।
- स्वास्थ्य व आयु वृद्धि हेतु – सिंदूर और घी का दीपक चढ़ाएँ।
- विवाह व संतान सुख हेतु – लाल चंदन अर्पित कर गजमुखास्य मंत्र का जाप करें।
उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वे बिना किसी संशय के मध्याह्न में गणपति की पूजा करें और परिवार में सुख-समृद्धि व मंगल की कामना करें।





