प्रमोद मिश्रा
रायपुर, 29 अगस्त 2025

बाल चिकित्सा हृदय देखभाल में ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए एमएमआई नारायणा अस्पताल, रायपुर ने 14 वर्षीय बालक पर भारत का पहला रिट्रीवेबल लीडलेस पेसमेकर इम्प्लांटेशन सफलतापूर्वक किया है। यह जटिल जन्मजात हृदय रोगों से पीड़ित बच्चों के लिए दीर्घकालिक और सुरक्षित उपचार की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
इस बालक का हृदय उपचार बचपन से जारी रहा है। दो वर्ष की आयु में दिल्ली में इंट्राकार्डियक रिपेयर (ICR) हुआ, वहीं पांच वर्ष की आयु में कंप्लीट हार्ट ब्लॉक (CHB) होने पर एमएमआई नारायणा में 29 अक्टूबर 2024 को ड्यूल-चैंबर पेसमेकर लगाया गया। फरवरी 2024 में पल्स जनरेटर बदलने की जरूरत हुई, लेकिन निकेल एलर्जी के कारण बार-बार समस्या उत्पन्न होने लगी। बच्चे की उम्र और भविष्य में बैटरी बदलने की चुनौती को देखते हुए, कार्डियोलॉजी टीम ने रिट्रीवेबल लीडलेस पेसमेकर का विकल्प चुना।
यह जटिल प्रक्रिया 21 अगस्त 2025 को वरिष्ठ कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. सुमंता शेखर पाधी के नेतृत्व में, प्रोक्तर डॉ. बलबीर सिंह की देखरेख में और जनरल एनेस्थीसिया के तहत की गई। एबॉट लिमिटेड द्वारा विकसित इस अत्याधुनिक उपकरण को इम्प्लांट करने के बाद अगले ही दिन बच्चे को स्वस्थ अवस्था में छुट्टी दे दी गई।
डॉ. पाधी ने कहा, “यह उपलब्धि भारत में बाल हृदय देखभाल के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति है। रिट्रीवेबल डिज़ाइन भविष्य में डिवाइस के प्रतिस्थापन को सुरक्षित और कम आक्रामक बनाएगा, जिससे बच्चों को लंबी अवधि तक बेहतर जीवन गुणवत्ता मिल सकेगी।”
इस सफलता में कार्डियोलॉजी टीम (डॉ. किंजल बक्शी, डॉ. सुनील गौनीयाल, डॉ. स्नेहिल गोस्वामी), कार्डियक सर्जिकल टीम (डॉ. हरी कुमार पीके, डॉ. मोहम्मद वसीम खान) और कार्डियक एनेस्थेटिक टीम (डॉ. अरुण अंडप्पन, डॉ. राकेश राजकुमार चंद और डॉ. धर्मेश लाड) का अहम योगदान रहा।
एमएमआई नारायणा अस्पताल के फैसिलिटी डायरेक्टर अजित बेल्लमकोंडा ने बताया कि अस्पताल पिछले 14 वर्षों से स्वास्थ्य सेवाओं में अग्रणी है और यहां 24×7 कैथ लैब सुविधा उपलब्ध है। इस सफलता ने साबित कर दिया है कि रायपुर अब देश के सबसे जटिल और दुर्लभ हृदय मामलों के इलाज का महत्वपूर्ण केंद्र बन चुका है।



