दुर्ग, 1 सितंबर 2025
जिले से एक हृदयविदारक घटना सामने आई है, जिसने पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया है। आर्थिक तंगी और मजबूरी के बीच एक दंपती ने ऐसा कदम उठाया कि अब उनके दोनों बेटे बेसहारा हो गए हैं।

सिकोला बस्ती जैतखाम में रहने वाले 50 वर्षीय तिलक कुर्रे पेंटिंग कर परिवार चलाते थे, जबकि पत्नी 40 वर्षीय शीतल मजदूरी कर मदद करती थी। घर की हालत पहले से ही खराब थी। बड़ा बेटा (24) मारपीट के मामले में 15 दिन से जेल में बंद है और छोटा बेटा (17) किसी तरह काम करके घर का खर्च चला रहा था।
इसी बीच शीतल गंभीर बीमारी से जूझने लगी। आंत का बड़ा ऑपरेशन हुआ, जिसमें करीब 10 यूनिट खून चढ़ाना पड़ा। इलाज का खर्च परिवार पर भारी पड़ गया और बिजली कनेक्शन तक कट गया। हालात से टूटकर तिलक ने 31 अगस्त की शाम घर में फांसी लगाकर जान दे दी।
परिवार ने शीतल को यह खबर नहीं बताई, लेकिन पति की मौत के करीब 12 घंटे बाद ही उसकी तबीयत बिगड़ गई और 1 सितंबर की सुबह उसने भी अस्पताल में दम तोड़ दिया।
अब इस परिवार के दोनों बेटे अकेले रह गए हैं—एक जेल में और दूसरा नाबालिग, जो मोहल्ले के लोगों की मदद से किसी तरह जीवन काट रहा है। स्थानीय लोग कहते हैं कि यह दंपती हमेशा एक-दूसरे का सहारा बना रहा, शायद इसी वजह से मौत भी उन्हें ज्यादा देर अलग नहीं रख सकी।





