प्रमोद मिश्रा
रायपुर, 01 सितंबर 2025

डेलनेट-डेवलपिंग लाइब्रेरी नेटवर्क, नई दिल्ली ने कलिंगा विश्वविद्यालय, नया रायपुर के सहयोग से शनिवार, 30 अगस्त 2025 को “पुस्तकालयों, एलआईएस पेशेवरों और उपयोगकर्ताओं का परिवर्तन और सशक्तिकरण: उभरते रुझान” विषय पर एक दिवसीय क्षेत्रीय कार्यशाला का सफल आयोजन किया। यह छत्तीसगढ़ में DELNET की पहली क्षेत्रीय कार्यशाला थी।
कार्यशाला का उद्घाटन दीप प्रज्वलन से हुआ। कलिंगा विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. संदीप गांधी ने सभी प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए प्राचीन भारतीय ज्ञान प्रणाली और पुस्तकालयों के इतिहास पर रोचक चर्चा की। उन्होंने बताया कि कैसे प्राचीन समय में ज्ञान संग्रहण और पुस्तकों के प्रबंधन के तरीके आज के आधुनिक पुस्तकालयों की नींव हैं।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कुलपति डॉ. आर. श्रीधर, विशिष्ट अतिथि डेलनेट, नई दिल्ली की निदेशक डॉ. संगीता कौल और गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय, बिलासपुर के विश्वविद्यालय पुस्तकालयाध्यक्ष डॉ. अनिल कुमार शर्मा रहे। मुख्य वक्ता ड्रिलबिट, सॉफ्ट टेक इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के सीईओ जयन्ना बेलवाडी ने अकादमिक अखंडता और साहित्यिक चोरी रोकने के उपायों पर बहुमूल्य जानकारी दी।
डॉ. संगीता कौल ने बताया कि DELNET दक्षिण एशिया का सबसे बड़ा पुस्तकालय नेटवर्क है, जिसमें 9,400 से अधिक पुस्तकालय जुड़े हुए हैं। यह छात्रों और शोधकर्ताओं को ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से दस्तावेज़ प्राप्त करने की सुविधा देता है। उन्होंने इसे भारतीय विश्वविद्यालयों के लिए क्रांतिकारी कदम बताया, जिससे छात्रों के शोध उत्पादन में वृद्धि हुई है।
कुलपति डॉ. आर. श्रीधर ने कहा कि पुस्तकालय अब केवल किताबों का भंडार नहीं बल्कि प्रामाणिक जानकारी के स्रोत के रूप में उभर रहे हैं। उन्होंने DELNET द्वारा आयोजित कार्यशाला और ज्ञानवर्धक सत्र के लिए आभार व्यक्त किया।
कार्यशाला का समापन डॉ. मोहम्मद नासिर, प्रोफेसर और प्रमुख-विश्वविद्यालय पुस्तकालय, कलिंगा ने धन्यवाद प्रस्ताव के साथ किया, जिसमें सभी पुस्तकालय प्रमुखों, शिक्षकों, छात्रों और अतिथियों का आभार व्यक्त किया गया।
इस कार्यशाला में राज्यभर के पुस्तकालयाध्यक्षों, एलआईएस पेशेवरों, शोधकर्ताओं और शिक्षाविदों ने भाग लिया, जिससे छत्तीसगढ़ में पुस्तकालय नेटवर्किंग और अकादमिक अनुसंधान को नई दिशा मिलने की संभावना बढ़ गई।





