प्रमोद मिश्रा
रायपुर, 15 अक्टूबर 2025
बस्तर संभाग में होने वाले बस्तर ओलंपिक-2025 की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। उप मुख्यमंत्री एवं खेल एवं युवा कल्याण मंत्री अरुण साव ने आज नवा रायपुर स्थित विश्राम भवन में वरिष्ठ अधिकारियों और बस्तर संभाग के सभी जिला खेल अधिकारियों के साथ बैठक कर तैयारियों की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि बस्तर ओलंपिक अब केवल क्षेत्रीय आयोजन नहीं रहा, इसकी ख्याति पूरे देश में फैल चुकी है, इसलिए इसे राष्ट्रीय स्तर की गुणवत्ता और अनुशासन के साथ आयोजित किया जाना चाहिए।

उप मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि विकासखंड स्तर पर मैदान, आवास, भोजन, यातायात, प्राथमिक चिकित्सा, निर्णायक और रेफरी सहित सभी आवश्यक व्यवस्थाएं समय से पहले पूरी की जाएं। बैठक में खेल सचिव यशवंत कुमार, संचालक तनूजा सलाम, उप संचालक रश्मि ठाकुर और खेल अधिकारी गिरीश शुक्ला भी मौजूद रहे।
खेल एवं युवा कल्याण विभाग के अधिकारियों ने जानकारी दी कि अब तक 3 लाख 9 हजार से अधिक खिलाड़ियों ने बस्तर ओलंपिक में भाग लेने के लिए पंजीयन कराया है।
जिलावार आंकड़े इस प्रकार हैं —
- बस्तर : 52,312
- नारायणपुर : 46,074
- दंतेवाड़ा : 44,395
- कोंडागांव : 43,333
- कांकेर : 42,228
- बीजापुर : 40,437
- सुकमा : 40,830
22 सितंबर से शुरू हुआ पंजीयन 20 अक्टूबर तक जारी रहेगा।
- विकासखंड स्तर : 25 अक्टूबर से 5 नवंबर
- जिला स्तर : 5 नवंबर से 15 नवंबर
- संभाग स्तर : 24 नवंबर से 30 नवंबर
अरुण साव ने ग्राम स्तर से लेकर जिला स्तर तक प्रचार-प्रसार बढ़ाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि दीवार लेखन, मशाल यात्रा, बैनर-पोस्टर और हाट-बाजारों में जनसंपर्क के माध्यम से अधिक से अधिक खिलाड़ियों तक पहुंच बनाई जाए।
उन्होंने पुरुष प्रतिभागियों की तुलना में कम पंजीयन पर चिंता व्यक्त करते हुए पुरुष खिलाड़ियों की भागीदारी बढ़ाने के लिए विशेष अभियान चलाने को कहा।
बस्तर ओलंपिक में 11 प्रमुख खेलों को शामिल किया गया है —
एथलेटिक्स, तीरंदाजी, बैडमिंटन, फुटबॉल, हॉकी, वेटलिफ्टिंग, कराटे, कबड्डी, खो-खो, वॉलीबॉल और रस्साकशी।
जूनियर और सीनियर वर्ग में बालक-बालिका, महिला-पुरुष श्रेणियों की प्रतियोगिताएं होंगी।
बस्तर ओलंपिक की एक विशेष पहल के तहत नक्सल हिंसा से प्रभावित दिव्यांगों और आत्मसमर्पित नक्सलियों के लिए भी अलग स्पर्धाएं रखी गई हैं, ताकि वे समाज की मुख्यधारा में अपने साहस और प्रतिभा का प्रदर्शन कर सकें।
उप मुख्यमंत्री ने कहा कि खेल विभाग के बजट के अतिरिक्त जरूरत पड़ने पर जिला कलेक्टरों के माध्यम से सीएसआर निधि से वित्तीय आवश्यकताओं की पूर्ति की जाएगी।
अरुण साव ने कहा, “बस्तर ओलंपिक अब बस्तर की पहचान बन चुका है। यहां का खेल उत्सव पूरे देश के लिए प्रेरणा का केंद्र है। हमें इसे समयबद्धता और उत्कृष्टता के साथ आयोजित करना है।”





