प्रमोद मिश्रा
रायपुर, 24 अक्टूबर 2025

छत्तीसगढ़ कांग्रेस में छिड़ी अंदरूनी हलचल अब अंतिम चरण में है. प्रदेश में कई जिलाध्यक्षों की कुर्सी हिलने वाली है और 30 अक्टूबर तक नए नामों की घोषणा की पूरी संभावना जताई जा रही है. दिल्ली में हुई अहम बैठक के बाद दावेदारों में मिश्री से ज्यादा घुली है उम्मीदों की मिठास और टिकटों से तेज दौड़ रही है दावेदारी की रेस. दूसरी तरफ बीजेपी इसे कांग्रेस के भीतर की खींचतान का नतीजा बताते हुए सोशल मीडिया पर तंज भी कस रही है.
बताया जा रहा है कि राष्ट्रीय महासचिव केसी वेणुगोपाल और संगठन प्रभारी सचिन पायलट ने PCC चीफ दीपक बैज, भूपेश बघेल, चरणदास महंत और टीएस सिंहदेव से अलग-अलग मुलाकात की, जिसके बाद लगभग सभी नामों पर सहमति बन चुकी है.
कांग्रेस खेमे में जबसे यह खबर फैली है, सूची आने से पहले ही नज़रें नामों के पास ठहर गई हैं. कोई कह रहा है असली परीक्षा संगठन की एकता की, कोई बुदबुदा रहा है सर्वसम्मति वाली राजनीति में अंदर ही अंदर चल रही खींचतान की कहानी.
रायपुर शहर से सुबोध हरितवाल सबसे मजबूत दावेदार माने जा रहे हैं. कुमार मेनन और दीपक मिश्रा का नाम भी जोरों पर है.
रायपुर ग्रामीण से प्रवीण साहू, पप्पू बंजारे और नागभूषण राव की चर्चा है.
दुर्ग ग्रामीण में राकेश ठाकुर लगभग फाइनल माने जा रहे हैं. युवा वर्ग में उनकी अच्छी पकड़ बताई जा रही है.
दुर्ग शहर में दो पूर्व महापौर धीरज बाकलीवाल और आरएन वर्मा की टक्कर है.
धमतरी से नीशु चंद्राकर और तारिणी चंद्राकर दोनों की दावेदारी मजबूत मानी जा रही है.
नीशु चरणदास महंत के करीबी, वहीं तारिणी कुरूद से पूर्व प्रत्याशी और बघेल समर्थक मानी जाती हैं.
महासमुंद में तिकड़ी का मुकाबला है:
- भूपेंद्र सिंह ठाकुर (द्वारिकाधीश यादव समर्थक)
- अमरजीत चावला (चरणदास महंत समर्थक)
- विनोद चंद्राकर (भूपेश बघेल समर्थक)
कवर्धा से दो नाम:
- होरीराम साहू (वर्तमान जिलाध्यक्ष)
- तुकाराम चन्द्रवंशी (जिला पंचायत सदस्य, तेजतर्रार छवि)
राजनांदगांव में मुकाबला:
- भागवत साहू (संगठन में पुरानी पैठ)
- नवाज खान (युवा समर्थन मजबूत)
BJP कह रही है कांग्रेस आपसी झगड़ों में उलझी, इसलिए अब तक नियुक्ति नहीं कर पाई.
कांग्रेस समर्थक पलटवार कर रहे हैं कि लोकतंत्र की असली खूबसूरती विचार और नेतृत्व के चयन की प्रक्रिया में है.
अब सबकी नजरें 30 अक्टूबर पर टिकी हैं. कौन संभालेगा जिला संगठन की कमान, कौन हटेगा कुर्सी से, और किसकी गुटबाज़ी मारेगी बाजी… इस जवाब का इंतजार कांग्रेस कार्यकर्ताओं को महाराजा एक्सप्रेस से भी ज्यादा रोमांचित कर रहा है.





