प्रमोद मिश्रा
रायपुर, 17 दिसंबर 2025

छत्तीसगढ़ के सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले में आधुनिक कृषि तकनीक ने खेती की तस्वीर बदल दी है। विकासखंड बरमकेला के ग्राम नवापाली निवासी प्रगतिशील किसान मुकेश चौधरी ने ड्रिप सिंचाई पद्धति अपनाकर धान और मिर्ची की खेती में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। नवाचार और तकनीकी समझ के दम पर वे आज सालाना लाखों रुपये की आमदनी कर रहे हैं और क्षेत्र के किसानों के लिए प्रेरणा बन चुके हैं।
मुकेश चौधरी ने वर्ष 2011 में दो एकड़ भूमि पर पारंपरिक तरीके से मिर्ची की खेती शुरू की थी। इसी दौरान उद्यान रोपणी केंद्र नदीगांव के तत्कालीन वरिष्ठ उद्यान अधीक्षक सुरेन्द्र पटेल से मार्गदर्शन मिला, जिससे उन्हें ड्रिप तकनीक की जानकारी हुई। इसके बाद वर्ष 2013 में बरमकेला ब्लॉक में पहली बार उन्होंने ड्रिप पद्धति से खेती की शुरुआत की।
ड्रिप तकनीक के तहत खेतों की गहरी जुताई, मेड निर्माण, लेटरल पाइप लाइन बिछाने और मल्चिंग का उपयोग कर मिर्ची की रोपाई की गई। संतुलित सिंचाई, खाद और दवाओं के सटीक उपयोग से उत्पादन में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई और मिर्ची की पैदावार लगभग दोगुनी हो गई। बेहतर परिणाम देखकर उन्होंने धान का रकबा घटाया और मिर्ची की खेती का विस्तार किया। वर्तमान में वे लगभग 12 एकड़ भूमि पर मिर्ची की खेती कर रहे हैं, जिससे उन्हें हर वर्ष लाखों रुपये की आय हो रही है।
मुकेश चौधरी की सफलता से प्रेरित होकर खिंचरी, बांजीपाली, बेंद्रापारा, रिसोरा, नूनपानी, लिंजिर और प्रधानपुर सहित आसपास के कई गांवों के किसान भी ड्रिप पद्धति से मिर्ची, साग-सब्जी और अन्य फसलों की खेती अपनाने लगे हैं।
खेती में नवाचार, जैविक और समन्वित कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने के लिए वर्ष 2021 में राज्य सरकार ने मुकेश चौधरी को डॉ. खूबचंद बघेल कृषक रत्न पुरस्कार से सम्मानित किया। उन्होंने धान के साथ-साथ दलहन-तिलहन फसलों—उड़द, मूंग और मिर्ची—की उन्नत खेती की। पुरस्कार स्वरूप उन्हें प्रशस्ति पत्र, मोमेंटो और दो लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की गई।
इस वर्ष कृषि विभाग ने मुकेश चौधरी को प्राकृतिक खेती के लिए बीआरसी (ब्लॉक रिसोर्स कोऑर्डिनेटर) नियुक्त किया है। उनके साथ टिकेश्वरी महापात्र (जलाकोना) और खेल कुमारी (धौंरादरहा) को भी यह जिम्मेदारी दी गई है। विभागीय प्रशिक्षण के बाद अब ये बीआरसी जलाकोना, धौंरादरहा, करपी, जामदलखा सहित दर्जनों गांवों में किसानों को प्राकृतिक संसाधनों से खाद निर्माण और बीज उपचार की तकनीक सिखा रहे हैं।
कृषि विभाग के अधिकारियों के अनुसार, मिर्ची की खेती के साथ प्राकृतिक कृषि अपनाने की मुकेश चौधरी की पहल क्षेत्र में खेती के नए अवसर खोल रही है और किसान आत्मनिर्भरता की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं।





