बिलासपुर, 07 जनवरी 2026

छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स) ने नेत्र चिकित्सा के क्षेत्र में एक और बड़ी उपलब्धि दर्ज की है। सिम्स के नेत्र रोग विभाग ने चार मरीजों का जटिल कॉर्निया प्रत्यारोपण (Corneal Transplant) सफलतापूर्वक कर उनकी आंखों की रोशनी लौटा दी है।
इन मरीजों में दो महिलाएं और दो पुरुष शामिल हैं, जिनकी उम्र 35 से 50 वर्ष के बीच है। सभी बिलासपुर जिले के निवासी हैं और धान की कटाई के दौरान आंखों में चोट लगने से फंगल कॉर्नियल अल्सर से पीड़ित हो गए थे। संक्रमण इतना गंभीर था कि आंख की पुतली सफेद हो चुकी थी और असहनीय दर्द के चलते आंख निकालने तक की नौबत आ गई थी।
नेत्र रोग विभागाध्यक्ष डॉ. सुचिता सिंह और डॉ. प्रभा सोनवानी के नेतृत्व में पहले संक्रमण को नियंत्रित किया गया। इसके बाद आई बैंक से प्राप्त नेत्रदान की मदद से सफलतापूर्वक कॉर्निया प्रत्यारोपण किया गया। ऑपरेशन के बाद चारों मरीजों की दृष्टि लौट आई है और उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है।
सिम्स के अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति ने इसे टीमवर्क की सफलता बताते हुए कहा कि नेत्रदान के प्रति बढ़ती जागरूकता से जरूरतमंदों को नई रोशनी मिल रही है। वहीं चिकित्सा अधीक्षक डॉ. लखन सिंह ने कहा कि सिम्स में ऐसे जटिल ऑपरेशन का सफल होना संस्थान की क्षमता को दर्शाता है।
डॉ. सुचिता सिंह ने किसानों से अपील की कि धान की कटाई के दौरान आंखों की सुरक्षा जरूर करें और चोट लगने पर खुद से दवा डालने के बजाय तुरंत विशेषज्ञ से संपर्क करें। उन्होंने कहा कि कई मामलों में कॉर्निया प्रत्यारोपण ही अंधत्व से बचने का एकमात्र विकल्प होता है।
इस सफल ऑपरेशन में डॉ. प्रभा सोनवानी, पीजी स्टूडेंट्स, नर्सिंग स्टाफ और अन्य कर्मचारियों का अहम योगदान रहा।





