बिलासपुर | 10 जनवरी 2026

छत्तीसगढ़ के गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय (GGU) से जुड़ा एक बड़ा शैक्षणिक और सांस्कृतिक विवाद सामने आया है। राष्ट्रीय परिसंवाद के मंच से एक वरिष्ठ साहित्यकार को अपमानित कर बाहर निकालने का मामला अब सड़क से लेकर राजभवन और राष्ट्रपति भवन तक पहुंच गया है।
राष्ट्रीय सेमिनार के दौरान कुलपति आलोक चक्रवाल द्वारा कथाकार मनोज रूपड़ा को मंच से बाहर निकालने के बाद पूरे देश के साहित्यिक जगत में आक्रोश फैल गया है।
7 जनवरी को GGU में आयोजित राष्ट्रीय परिसंवाद का विषय था — समकालीन हिंदी कहानी। देश के कई राज्यों से प्रतिष्ठित साहित्यकार और प्रोफेसर इसमें शामिल हुए थे।
कार्यक्रम के दौरान कुलपति आलोक चक्रवाल विषय से हटकर अपने निजी जीवन, उपलब्धियों और भाषाई पृष्ठभूमि पर लंबा वक्तव्य देने लगे। इसी बीच जब कथाकार मनोज रूपड़ा ने शालीनता से कहा —
“मुद्दे की बात हो तो बेहतर होगा”,
तो कुलपति भड़क गए।
उन्होंने मंच से ही कहा —
“तुम्हें कुलपति से बात करने की तमीज नहीं है, बाहर जाइए”
और सार्वजनिक रूप से अपमानित करते हुए मनोज रूपड़ा को कार्यक्रम से निकाल दिया।
इस व्यवहार से नाराज कई साहित्यकार और प्रोफेसर भी मंच छोड़कर बाहर चले गए। कार्यक्रम का माहौल पूरी तरह तनावपूर्ण हो गया।
लेखकों का कहना है कि
“विश्वविद्यालय बहस और विचार की जगह होते हैं, वहां तानाशाही और अपमान की कोई जगह नहीं होनी चाहिए।”
बिलासपुर में साहित्यकार, कथाकार, संस्कृतिकर्मी और जनसंस्कृति मंच के लोग सड़कों पर उतरे।
कलेक्टर के माध्यम से राज्यपाल और राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपकर मांग की गई —
➡ कुलपति आलोक चक्रवाल को तुरंत पद से हटाया जाए
➡ पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच हो
➡ विश्वविद्यालय की गरिमा बहाल की जाए
उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर कार्रवाई नहीं हुई तो राज्यव्यापी आंदोलन शुरू किया जाएगा।
साहित्यकारों ने कहा कि
“राष्ट्रीय मंच पर लेखक को अपमानित करना केवल एक व्यक्ति का नहीं, पूरे बौद्धिक जगत का अपमान है।”
उनका आरोप है कि इस घटना से GGU और छत्तीसगढ़ की छवि राष्ट्रीय स्तर पर धूमिल हुई है।
इस पूरे मामले का वीडियो भी सामने आया है, जिसे लेकर साहित्य जगत चाहता है कि
राज्यपाल और राष्ट्रपति खुद संज्ञान लें और VC के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करें।
छत्तीसगढ़ का यह शैक्षणिक विवाद अब एक बड़े लोकतांत्रिक संघर्ष का रूप ले चुका है।





