बिलासपुर, 12 जनवरी 2026। स्वामी आत्मानंद इंग्लिश मीडियम स्कूलों को लेकर एक बार फिर प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। कांग्रेस नेता शैलेष पांडेय ने भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि सिर्फ 8 शिक्षकों का वेतन न दे पाने के कारण बिलासपुर के लगभग 200 मासूम बच्चों का भविष्य अंधकार में धकेल दिया गया है।
शैलेष पांडेय ने कहा कि स्वामी आत्मानंद योजना कांग्रेस सरकार की सबसे लोकप्रिय और ऐतिहासिक योजना रही है, जिसने गरीब और मध्यम वर्ग के हजारों बच्चों को निजी स्कूलों जैसी गुणवत्तापूर्ण अंग्रेज़ी माध्यम शिक्षा मुफ्त में उपलब्ध कराई। लेकिन भाजपा सरकार शुरू से ही इस योजना को लेकर असहज रही है और अब उसे धीरे-धीरे खत्म करने की साजिश रच रही है।

उन्होंने कहा कि बिलासपुर के स्वामी आत्मानंद स्कूल की नर्सरी कक्षाओं में सिर्फ 200 बच्चे पढ़ते हैं और उन्हें पढ़ाने के लिए केवल 8 शिक्षक हैं। ऐसे में सरकार उनके वेतन की व्यवस्था भी नहीं कर पाई, जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि डीएमएफ फंड से भुगतान संभव नहीं था तो संविदा मद से, जो हर साल लैप्स हो जाता है, वहां से वेतन क्यों नहीं दिया गया?
शैलेष पांडेय ने जिला प्रशासन पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि बिलासपुर के कलेक्टर और डीईओ ने भी बच्चों के भविष्य को बचाने में कोई रुचि नहीं दिखाई। उन्होंने कहा कि कलेक्टर को सरकार से बात कर किसी अन्य मद से भुगतान की व्यवस्था करनी चाहिए थी ताकि बच्चों की पढ़ाई बंद न हो।
उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार का पुराना ढर्रा रहा है—पहले स्कूल खोलो, फिर बंद करो। बिलासपुर से शुरू हुई स्वामी आत्मानंद योजना को ही आज उसी जिले से बलि चढ़ाने की शुरुआत की जा रही है।
अंत में शैलेष पांडेय ने राज्य सरकार से मांग की कि बंद किए गए स्वामी आत्मानंद स्कूलों को तत्काल पुनः शुरू किया जाए और मासूम बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ बंद किया जाए।





