प्रमोद कुमार
रायपुर, 15 जनवरी 2026

23 जनवरी से रायपुर में लागू होने जा रहे पुलिस कमिश्नरी सिस्टम को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। शासन द्वारा गठित विशेषज्ञ समिति ने जहां ओडिशा के भुवनेश्वर पुलिस कमिश्नरी मॉडल को सबसे उपयुक्त मानते हुए 22 मजिस्ट्रियल अधिकार देने की सिफारिश की थी, वहीं गृह विभाग ने मध्यप्रदेश के भोपाल मॉडल को लागू करने का निर्णय लिया है, जिसमें पुलिस कमिश्नर को केवल 10–12 सीमित अधिकार ही दिए जाते हैं।
इस फैसले से रायपुर में लागू होने जा रहा कमिश्नरी सिस्टम नाम का तो “कमिश्नरी” होगा, लेकिन असल शक्तियां जिला प्रशासन के पास ही बनी रहेंगी।
राज्य सरकार ने पिछले वर्ष एडीजी प्रदीप गुप्ता के नेतृत्व में 8 सदस्यीय समिति बनाई थी, जिसने देश के आठ बड़े शहरों — मुंबई, दिल्ली, नागपुर, कानपुर, वाराणसी, जयपुर, भुवनेश्वर और भोपाल — के पुलिस कमिश्नरी सिस्टम का अध्ययन किया।
समिति ने रायपुर की जनसंख्या, भौगोलिक स्थिति, पुलिस बल और अपराध प्रवृत्ति को देखते हुए भुवनेश्वर मॉडल को सबसे उपयुक्त बताया और पुलिस कमिश्नर को 22 से अधिक मजिस्ट्रियल अधिकार देने की अनुशंसा की थी।
इन अधिकारों में शामिल थे —
- राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA)
- जिला बदर
- आबकारी लाइसेंस
- शस्त्र लाइसेंस
- धारा 133, 145
- सार्वजनिक उपद्रव रोकने के अधिकार
- कई केंद्रीय और राज्य कानूनों के तहत कार्रवाई
गृह विभाग अब भुवनेश्वर के बजाय भोपाल पुलिस कमिश्नरी सिस्टम लागू कर रहा है। भोपाल में पुलिस कमिश्नर को केवल 10–12 सीमित अधिकार दिए गए हैं, जबकि असली शक्तियां आज भी कलेक्टर और एसडीएम के पास रहती हैं।
भोपाल मॉडल में:
- गन लाइसेंस का अधिकार नहीं
- आबकारी लाइसेंस नहीं
- प्रशासनिक नियंत्रण पुलिस के पास नहीं
- केवल धारा 144, 151, 107, 116 और जिलाबदर जैसे सीमित अधिकार
यही व्यवस्था अब रायपुर में भी लाई जा रही है।
सरकार पुलिस कमिश्नर को वही अधिकार देने जा रही है, जो भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 15 में पहले से दिए गए हैं। यानी नए कानून का उपयोग कर सिर्फ न्यूनतम मजिस्ट्रियल शक्तियां पुलिस को दी जा रही हैं, जबकि असली अधिकार प्रशासन के पास सुरक्षित रखे जा रहे हैं।
इनमें प्रमुख हैं —
- शस्त्र अधिनियम 1959
- राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम 1980
- आबकारी अधिनियम
- आवश्यक वस्तु अधिनियम
- विस्फोटक अधिनियम
- विदेशी अधिनियम
- पशु क्रूरता अधिनियम
- सिनेमैटोग्राफ अधिनियम
- राजद्रोह सभा रोकथाम कानून
- पेट्रोलियम अधिनियम
- अनैतिक व्यापार निवारण अधिनियम
- मोटर वाहन अधिनियम
लेकिन इनमें से अधिकांश अधिकार अब भी कलेक्टर के पास ही रहेंगे।
- धारा 144 लागू करना
- गिरफ्तारी के बाद बॉन्ड ओवर
- कर्फ्यू लगाने का अधिकार
- जिलाबदर
- कुछ मामलों में शस्त्र लाइसेंस
- बार-बार दुर्घटना पर लाइसेंस रद्द
- वेश्यावृत्ति पर कार्रवाई
- NSA के सीमित अधिकार
जिस उद्देश्य से रायपुर में पुलिस कमिश्नरी लाई जा रही थी — तेज़ निर्णय, सख्त कानून-व्यवस्था और एकल कमांड — वह भोपाल मॉडल से पूरा होता नहीं दिख रहा। विशेषज्ञों की सिफारिश को नजरअंदाज कर सरकार एक ऐसा सिस्टम ला रही है जिसमें नाम बदलेगा, लेकिन सत्ता नहीं।





