प्रमोद कुमार
रायपुर, 09 मार्च 2026। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की ‘मिसिंग चिल्ड्रन रिपोर्ट’ में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक बच्चों के लापता होने के मामलों में छत्तीसगढ़ देश में छठवें स्थान पर है। पिछले करीब 5 साल से राज्य टॉप-10 राज्यों की सूची में बना हुआ है, जो चिंता का विषय माना जा रहा है।

रिपोर्ट के अनुसार 1 जनवरी 2025 से 31 जनवरी 2026 के बीच देशभर में 33 हजार 577 बच्चे लापता हुए। इनमें से 7 हजार 777 बच्चों का अब तक कोई सुराग नहीं मिला, जबकि बाकी बच्चों को पुलिस और प्रशासन ने ढूंढ लिया है। इस सूची में पश्चिम बंगाल पहले और मध्यप्रदेश दूसरे स्थान पर है।
छत्तीसगढ़ में जनवरी 2025 से जनवरी 2026 के बीच 982 बच्चे लापता हुए। इनमें से 582 बच्चों को बरामद कर लिया गया, लेकिन 400 बच्चे अब भी लापता हैं। इन बच्चों की तलाश के लिए पुलिस और प्रशासन ऑपरेशन मुस्कान अभियान चला रहे हैं।
राज्य में बच्चों के लापता होने के मामले कुछ जिलों में ज्यादा सामने आए हैं।
- जांजगीर-चांपा – सबसे ज्यादा
- रायपुर
- बिलासपुर
- सक्ति
- दुर्ग
- बलौदाबाजार
ऑपरेशन मुस्कान के तहत अब तक 559 बच्चों को तलाशकर परिवार तक पहुंचाया गया, जिनमें सबसे ज्यादा बच्चे जांजगीर जिले के पाए गए।
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक औद्योगिक और शहरी क्षेत्रों में प्रवासी परिवारों की संख्या अधिक होने के कारण कई बार बच्चे भटक जाते हैं और परिवार से अलग हो जाते हैं। इसके अलावा मानव तस्करी करने वाले गिरोह भी बच्चों को बड़े शहरों में नौकरी या ज्यादा पैसे का लालच देकर ले जाते हैं और उनसे मजदूरी करवाते हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक नगालैंड, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, त्रिपुरा, गुजरात, लक्षद्वीप और दादर-नगर हवेली में बच्चों के लापता होने की कोई शिकायत दर्ज नहीं हुई है।
सबसे चिंताजनक बात यह है कि लापता बच्चों में 14 से 17 साल की लड़कियों की संख्या ज्यादा बताई गई है, जिसको लेकर सुरक्षा और निगरानी बढ़ाने की जरूरत बताई जा रही है।





