सतीश शर्मा
रायपुर, 23 मार्च 2026। छत्तीसगढ़ का गरियाबंद जिला इन दिनों पर्यटन के प्रमुख केंद्र के रूप में उभर रहा है। यहां की हरियाली, झरनों की गूंज, धार्मिक स्थलों की आस्था और जंगलों की शांति पर्यटकों को खास अनुभव दे रही है।

जिले के ग्राम मरोदा के पास स्थित भूतेश्वरनाथ महादेव मंदिर अपनी विशेष मान्यता के कारण श्रद्धालुओं के बीच आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। यहां स्थित प्राकृतिक शिवलिंग के बारे में कहा जाता है कि यह हर वर्ष स्वतः बढ़ता है। सावन और महाशिवरात्रि के अवसर पर हजारों श्रद्धालु यहां जलाभिषेक के लिए पहुंचते हैं।
वहीं, जतमई मंदिर और घटारानी मंदिर क्षेत्र प्राकृतिक सौंदर्य के लिए प्रसिद्ध हैं। खासकर बारिश के मौसम में यहां के झरने पूरी रफ्तार से बहते हैं और चारों ओर धुंध और पानी की फुहार का मनमोहक दृश्य बनता है। ऊंची चट्टानों से गिरता पानी, घने जंगल और ठंडी हवाएं पर्यटकों को सुकून का एहसास कराती हैं।
घटारानी मंदिर के पास बहता बहु-स्तरीय झरना और जतमई माता मंदिर के आसपास का धार्मिक वातावरण यहां आने वाले लोगों को आध्यात्मिक और प्राकृतिक अनुभव का अद्भुत संगम प्रदान करता है। पर्यटक यहां पिकनिक, फोटोग्राफी और ट्रैकिंग का भरपूर आनंद लेते हैं।
प्रकृति और वन्यजीव प्रेमियों के लिए उदंती-सीतानदी अभयारण्य भी खास आकर्षण है। जैव विविधता से भरपूर यह अभयारण्य विशेष रूप से जंगली भैंसों के संरक्षण के लिए जाना जाता है और यहां का शांत वातावरण सैलानियों को प्रकृति के करीब ले जाता है।
रायपुर से करीब 90 किलोमीटर दूर स्थित गरियाबंद तक सड़क मार्ग से 2 से 3 घंटे में आसानी से पहुंचा जा सकता है। अभनपुर और राजिम होते हुए जाने वाला रास्ता हरियाली और प्राकृतिक दृश्यों से भरपूर है, जो यात्रा को और भी सुहावना बना देता है।
कुल मिलाकर, गरियाबंद जिला प्रकृति, आस्था और रोमांच का ऐसा संगम है, जहां हर यात्रा एक यादगार अनुभव बन जाती है।



