24 Jul 2026, Fri
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GGU की BA-LLB छठवें सेमेस्टर की परीक्षा रद्द: पेपर लीक मामले में बड़ा एक्शन, 27 जुलाई से री-एग्जाम; छात्रों ने फैसले का किया विरोध

बिलासपुर, 23 जुलाई 2026। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर स्थित गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय (GGU) में चर्चित पेपर लीक मामले के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने बड़ा फैसला लिया है। प्रशासन ने बीए-एलएलबी छठवें सेमेस्टर की मुख्य परीक्षा रद्द कर दी है। साथ ही 27 जुलाई से दोबारा परीक्षा कराने के लिए नई समय-सारिणी भी जारी कर दी गई है। हालांकि इस फैसले का लॉ विभाग के छात्र-छात्राओं ने विरोध शुरू कर दिया है। छात्रों का कहना है कि परीक्षा रद्द करने से पहले जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की जानी चाहिए थी।

विश्वविद्यालय की ओर से जारी आदेश में प्रशासनिक कारणों का हवाला देते हुए 7 मई से 28 मई 2026 के बीच आयोजित बीए-एलएलबी छठवें सेमेस्टर की परीक्षा निरस्त कर दी गई है। अब नई समय-सारिणी के अनुसार 27 जुलाई से री-एग्जाम कराया जाएगा। आदेश जारी होते ही छात्र विश्वविद्यालय परिसर में एकत्र हुए और री-एग्जाम के फैसले पर आपत्ति जताई।

जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग

छात्रों ने रजिस्ट्रार प्रो. अश्वनी दीक्षित को ज्ञापन सौंपकर मांग की कि जिस फैक्ट फाइंडिंग रिपोर्ट के आधार पर परीक्षा रद्द की गई है, उसे सार्वजनिक किया जाए। उनका कहना है कि पूरी पारदर्शिता के साथ कार्रवाई होनी चाहिए और केवल छात्रों को दोबारा परीक्षा देने के लिए मजबूर करना उचित नहीं है। छात्रों ने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और री-एग्जाम के फैसले पर पुनर्विचार की भी मांग की।

 

 

डेढ़ महीने तक कार्रवाई नहीं होने पर उठे सवाल

पेपर लीक मामले की जांच के लिए गठित पांच सदस्यीय फैक्ट फाइंडिंग कमेटी ने 6 जून को अपनी रिपोर्ट विश्वविद्यालय प्रशासन को सौंप दी थी। इसके बावजूद करीब डेढ़ महीने तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। अब परीक्षा रद्द करने के फैसले के बाद छात्र सवाल उठा रहे हैं कि यदि रिपोर्ट पहले ही मिल गई थी तो कार्रवाई में इतनी देरी क्यों हुई।

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पोर्टल हैक नहीं, लॉगिन आईडी से लीक हुआ था प्रश्नपत्र

जांच में सामने आया कि विश्वविद्यालय का समर्थ पोर्टल हैक नहीं हुआ था, बल्कि किसी ने लॉगिन आईडी और पासवर्ड का इस्तेमाल कर प्रश्नपत्र और अन्य गोपनीय दस्तावेजों तक पहुंच बनाई। फैक्ट फाइंडिंग कमेटी ने मामले की पुलिस जांच कराने की भी सिफारिश की है।

विश्वविद्यालय ने अब विभागीय जांच समिति का गठन किया है। समिति में प्रो. एस.सी. श्रीवास्तव, प्रॉक्टर प्रो. मुकेश कुमार सिंह, प्रो. खेमचंद देवांगन, ओएसडी प्रो. भारती अहिरवार और सहायक रजिस्ट्रार (परीक्षा) टी.पी. सिंह को शामिल किया गया है।

पहले हटाए जा चुके हैं डीन और एचओडी

पेपर लीक मामले में विवाद बढ़ने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन पहले ही लॉ विभाग के तत्कालीन डीन एवं एचओडी प्रो. सुधांशु रंजन मोहापात्रा को पद से हटा चुका है। उनकी जगह इतिहास विभाग के प्रो. प्रवीण मिश्रा को लॉ विभाग का नया डीन और एचओडी बनाया गया है। छात्रों ने इस पूरे मामले की शिकायत राष्ट्रपति और विश्वविद्यालय के कुलाध्यक्ष तक भी भेजी थी।

पुलिस जांच की संभावना

फैक्ट फाइंडिंग कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर अब पुलिस जांच की भी संभावना जताई जा रही है। यदि जांच में किसी अधिकारी या कर्मचारी की भूमिका सामने आती है तो उनके खिलाफ विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि परीक्षा प्रक्रिया की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।

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