बेमेतरा, 29 मार्च 2026/ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की जिला इकाई द्वारा रविवार को आयोजित प्रमुख जन गोष्ठी में सहकार भारती के प्रदेश महामंत्री एवं संघ के प्रांत कार्यकारिणी सदस्य कनिराम ने कहा कि संघ का मूल कार्य भारत की श्रेष्ठ सांस्कृतिक परंपराओं का संरक्षण और समाज का संगठित निर्माण है। उन्होंने बताया कि संघ की कार्यपद्धति शास्त्रसम्मत और समाज आधारित है, जिसमें किसी भी आयु वर्ग का व्यक्ति सहज रूप से जुड़ सकता है।

उन्होंने कहा कि संघ की शाखा की विशेष कार्यशैली के कारण सामान्य स्वयंसेवक भी समाज में असाधारण कार्य करने की क्षमता विकसित कर लेता है। संघ व्यक्ति निर्माण का कार्य करता है और समाज को साथ लेकर राष्ट्र को परम वैभव के शिखर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि संघ में किसी प्रकार का भेदभाव नहीं है, जिसका अनुभव महात्मा गांधी ने भी वर्धा में संघ शिविर के दौरान किया था।


कनिराम ने कहा कि भारत की प्राचीन संत परंपरा ने हमेशा “भारत एक राष्ट्र है” का संदेश दिया। महाराष्ट्र के संत ज्ञानेश्वर, तुकाराम, एकनाथ, असम के शंकरदेव, बंगाल के चैतन्य महाप्रभु और छत्तीसगढ़ के बाबा घासीदास जैसे संतों ने समाज को एकता और समरसता का मार्ग दिखाया। उन्होंने कहा कि समय के साथ उत्पन्न सामाजिक विषमताओं और कुरीतियों को दूर करने के लिए संघ पिछले 100 वर्षों से संगठित प्रयास कर रहा है। शताब्दी वर्ष में संघ “पंच परिवर्तन” के विषय पर व्यापक कार्य कर रहा है।
यह कार्यक्रम स्थानीय साहू छात्रावास भवन में आयोजित हुआ, जिसमें जिले के विभिन्न समाज प्रमुखों, मातृशक्ति, विशिष्ट जनों और गणमान्य नागरिकों की उपस्थिति रही। कार्यक्रम में विभाग संघचालक डॉ. कमलेश निषाद और जिला संघचालक राजकुमार देवांगन मंच पर उपस्थित थे।
कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुई। प्रारंभ में जिज्ञासा समाधान सत्र आयोजित किया गया, जिसमें उपस्थित लोगों ने संघ से जुड़े अपने प्रश्न पूछे, जिनका समाधान मुख्य वक्ता द्वारा किया गया। अंत में राष्ट्रगीत वंदेमातरम् के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।



