सतीश शर्मा
रायपुर, 8 अप्रैल 2026: छत्तीसगढ़ में आयोजित पहले खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 ने देशभर के जनजातीय समुदायों के खिलाड़ियों को एक साझा मंच पर एकत्रित किया, जहाँ अलग-अलग स्तर के खिलाड़ियों ने अपनी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया। कुछ के लिए यह बहु-खेल प्रतियोगिता में हिस्सा लेने का पहला अनुभव था, तो कुछ के लिए यह उनके उभरते हुए करियर का अगला महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ।

इस उद्घाटन संस्करण में 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने भाग लिया, जिसमें लगभग 3800 खिलाड़ियों ने नौ खेल विधाओं में प्रतिस्पर्धा की। तीरंदाजी, एथलेटिक्स, फुटबॉल, हॉकी, तैराकी, वेटलिफ्टिंग और कुश्ती में कुल 106 स्वर्ण पदक दांव पर थे, जबकि पारंपरिक खेलों जैसे मल्लखंभ और कबड्डी को प्रदर्शन खेलों के रूप में शामिल किया गया।
भारत जहां 2030 राष्ट्रमंडल खेलों की मेजबानी की तैयारी कर रहा है और 2036 ओलंपिक की संभावित मेजबानी के लिए अपनी दावेदारी मजबूत कर रहा है, ऐसे में खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स ने विविध जनजातीय पृष्ठभूमि के खिलाड़ियों को अपनी क्षमता दिखाने और विभिन्न खेलों में भारत की बेंच स्ट्रेंथ को मजबूत करने का अवसर प्रदान किया। ये खेल छत्तीसगढ़ के तीन शहरों—रायपुर, जगदलपुर और अंबिकापुर—में आयोजित किए गए।
यहाँ कुछ ऐसे खिलाड़ियों की झलक प्रस्तुत है जो पहले से ही राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रभाव छोड़ रहे हैं, और कुछ ऐसे भी जिन्होंने भविष्य में उत्कृष्ट प्रदर्शन की संभावना दिखाई है—
मणिकांता एल (तैराक)
खेलों के सबसे सफल खिलाड़ी के रूप में उभरे मणिकांता एल ने तैराकी प्रतियोगिता में आठ स्वर्ण और एक रजत पदक जीतकर कर्नाटक को समग्र चैंपियन बनने की मजबूत नींव दी। 21 वर्षीय मणिकांता पहले भी खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स में पदक जीत चुके हैं और आगामी एशियाई खेलों के लिए भारतीय टीम में जगह बनाने की तैयारी कर रहे हैं।
200 मीटर ब्रेस्टस्ट्रोक विशेषज्ञ मणिकांता ने अधिकांश रेस में अपना दबदबा कायम रखा।
अंजलि मुंडा (तैराक)
ओडिशा के जाजपुर जिले की 15 वर्षीय अंजलि मुंडा तैराकी प्रतियोगिता की सबसे चमकदार उभरती सितारों में से एक रहीं। उन्होंने पांच स्वर्ण पदक जीतकर अपनी बहुमुखी प्रतिभा का प्रदर्शन किया और अपने से अधिक उम्र के खिलाड़ियों को पछाड़ा।
अंजलि कलिंगा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज की छात्रा हैं और अपने पहले ही बड़े मंच पर बिना दबाव के खेलते हुए नजर आईं।
कोमालिका बारी (तीरंदाज)
कोमालिका बारी, जो दीपिका कुमारी के बाद विश्व कैडेट और विश्व यूथ चैंपियन बनने वाली दूसरी भारतीय हैं, 2026 एशियाई खेलों के लिए प्रबल दावेदार मानी जा रही हैं। उन्होंने व्यक्तिगत और मिक्स्ड टीम रिकर्व में स्वर्ण पदक जीता, जबकि महिला टीम स्पर्धा में रजत पदक हासिल किया।
किरण पिस्दा (फुटबॉल)
छत्तीसगढ़ महिला फुटबॉल टीम की कप्तान किरण पिस्दा ने शानदार नेतृत्व करते हुए टीम को स्वर्ण पदक दिलाया। सेमीफाइनल में पेनल्टी शूटआउट के दौरान गोलकीपर बनकर उनका प्रदर्शन निर्णायक रहा।
किरण सैफ प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं और क्रोएशियाई लीग में भी खेल चुकी हैं।
बाबूलाल हेम्ब्रम (वेटलिफ्टर)
झारखंड के 19 वर्षीय बाबूलाल हेम्ब्रम ने रजत पदक जीतकर सीनियर स्तर पर अपनी मजबूत दावेदारी पेश की। वह IWF वर्ल्ड यूथ चैंपियनशिप और एशियन यूथ चैंपियनशिप में भी पदक जीत चुके हैं और वर्तमान में साई पटियाला में प्रशिक्षण ले रहे हैं।
शिव कुमार सोरेन (स्प्रिंटर)
धावक शिव कुमार सोरेन ने 100 मीटर (10.58 सेकंड) और 200 मीटर (21.51 सेकंड) में स्वर्ण पदक जीतकर अपनी गति का लोहा मनवाया। उनका प्रदर्शन भविष्य के लिए बेहद उम्मीदें जगाता है।
झिल्ली दलाबेहरा (वेटलिफ्टर)
ओडिशा की अनुभवी वेटलिफ्टर झिल्ली दलाबेहरा ने 53 किलोग्राम वर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर अपनी श्रेष्ठता साबित की। वह पहले ही एशियन वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप और कॉमनवेल्थ वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप में पदक जीत चुकी हैं।
भार्गवी भगोरा (तीरंदाज)
गुजरात की भार्गवी भगोरा ने फाइनल में भले हार का सामना किया, लेकिन उन्होंने कोमालिका बारी को कड़ी टक्कर देकर अपनी क्षमता का परिचय दिया। वह खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स में तीन पदक जीत चुकी हैं और नडियाद हाई परफॉर्मेंस सेंटर में प्रशिक्षण ले रही हैं।
निष्कर्ष:
खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 ने यह साबित कर दिया कि देश के जनजातीय क्षेत्रों में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। सही मंच और संसाधन मिलने पर ये खिलाड़ी न सिर्फ राष्ट्रीय बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी भारत का नाम रोशन कर सकते हैं।



