सतीश शर्मा
रायपुर, 08 अप्रैल 2026। कभी लाल आतंक और भय के साये में जीने वाला सुकमा अब तेजी से बदलती तस्वीर के साथ स्वास्थ्य सेवाओं के नए दौर में प्रवेश कर चुका है। शांति और सुरक्षा के माहौल के बीच आयोजित मेगा हेल्थ कैंप में 6500 से अधिक लोगों ने इलाज और जांच का लाभ लिया, जो इस बदलाव का सबसे बड़ा प्रमाण बनकर सामने आया है।

जिला प्रशासन सुकमा और बेंगलुरु के एनटीआर फाउंडेशन के संयुक्त प्रयासों से आयोजित इस दो दिवसीय सुपर स्पेशलिटी स्वास्थ्य शिविर का शुभारंभ प्रभारी मंत्री केदार कश्यप ने किया। शिविर में उन दूरस्थ और संवेदनशील इलाकों से भी 3700 से ज्यादा ग्रामीण पहुंचे, जो कभी मुख्यधारा से कटे हुए थे।
कमिश्नर डोमन सिंह के निर्देश और कलेक्टर अमित कुमार के मार्गदर्शन में आयोजित इस कैंप में 21 विशेषज्ञ डॉक्टरों और 40 स्वास्थ्य कर्मियों की टीम ने सेवाएं दीं। कैंप में कैंसर, हृदय रोग, स्त्री रोग, नेत्र रोग और न्यूरोलॉजी जैसी गंभीर बीमारियों का मुफ्त इलाज और जांच की गई।
989 बुजुर्गों को चश्मे, 1500 बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण, और 85 महिलाओं की कैंसर स्क्रीनिंग की गई। इसके साथ ही 2300 आभा आईडी और 153 आयुष्मान कार्ड बनाकर लोगों को भविष्य के लिए स्वास्थ्य सुरक्षा से भी जोड़ा गया।
इस शिविर ने यह साफ कर दिया कि अब सुकमा के ग्रामीण डर और बंदूक की छाया से बाहर निकलकर आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं पर भरोसा जता रहे हैं। जहां कभी गोलियों की गूंज सुनाई देती थी, आज वहां सेवा, विश्वास और विकास की नई कहानी लिखी जा रही है।
यह पहल केवल एक स्वास्थ्य शिविर नहीं, बल्कि सरकार और प्रशासन के प्रति बढ़ते जनविश्वास का उत्सव है। सुकमा अब नक्सलवाद की पहचान को पीछे छोड़ते हुए सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज की दिशा में एक रोल मॉडल बनकर उभर रहा है।



