मुंबई, 27 अप्रैल 2026: नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इंडिया लिमिटेड (National Stock Exchange of India Limited) ने इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन (Central Electricity Regulatory Commission – CERC) द्वारा जारी पावर मार्केट (ड्राफ्ट सेकंड संशोधन) नियम, 2026 का स्वागत किया है। इन प्रस्तावित नियमों के तहत भारत के पावर सेक्टर में “मार्केट कपलिंग” लागू करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है।

संशोधन के अनुसार, ग्रिड इंडिया (Grid-India) अगले छह महीनों के भीतर आयोग की मंजूरी से पावर मार्केट कपलिंग प्रोसीजर (PMCP) तैयार करेगा, जिससे देश के विभिन्न पावर एक्सचेंजों को एकीकृत कीमत निर्धारण प्रणाली से जोड़ा जा सकेगा।
एनएसई ने इस कदम को भारतीय पावर मार्केट में पारदर्शिता, दक्षता और समान मूल्य निर्धारण की दिशा में महत्वपूर्ण सुधार बताया है। “वन नेशन, वन ग्रिड, वन प्राइस” की अवधारणा को मजबूत करने में यह प्रणाली निर्णायक भूमिका निभा सकती है।
प्रस्तावित व्यवस्था के तहत मार्केट कपलिंग ऑपरेटर (ग्रिड इंडिया) देश के तीन प्रमुख स्पॉट पावर एक्सचेंजों—Indian Energy Exchange, Power Exchange India Limited और Hindustan Power Exchange—से सभी बोलियां एकत्र करेगा। इसके बाद एक केंद्रीकृत सिस्टम के जरिए एक समान मार्केट-क्लियरिंग प्राइस तय की जाएगी।
इसके बाद सभी एक्सचेंज इसी एकीकृत कीमत के आधार पर ट्रेड सेटल करेंगे, जिससे अलग-अलग कीमतों की असमानता समाप्त होने की उम्मीद है।
एनएसई ने बताया कि यह मॉडल उसके मंथली इलेक्ट्रिसिटी फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट्स के सेटलमेंट प्रोसेस से मिलता-जुलता है, जहां ड्यू डेट रेट (DDR) सभी एक्सचेंजों की वॉल्यूम-वेटेड औसत कीमतों के आधार पर तय की जाती है। इसके विपरीत कुछ सिस्टम केवल साधारण औसत कीमत का उपयोग करते हैं, जिससे वास्तविक बाजार मूल्य का सही प्रतिबिंब नहीं मिल पाता।
वर्तमान में मार्केट कपलिंग लागू नहीं होने के कारण बिजली की कीमतों में बड़ा अंतर देखा जा रहा है। अप्रैल 2026 में एनएसई का वॉल्यूम-वेटेड औसत ड्यू डेट रेट लगभग ₹3,802/एमडब्ल्यूएच है, जबकि साधारण औसत के आधार पर यह लगभग ₹4,442/एमडब्ल्यूएच है।
इस अंतर से डिस्कॉम्स पर भारी वित्तीय बोझ पड़ रहा है। अनुमान के अनुसार, यदि मासिक खपत 1,000 एमयू मानी जाए तो अतिरिक्त लागत लगभग ₹70 करोड़ प्रति माह और सालाना करीब ₹840 करोड़ तक पहुंच सकती है।
एनएसई के एमडी और सीईओ आशीष कुमार चौहान ने कहा कि यह संशोधन पावर मार्केट के लिए ऐतिहासिक कदम है। उनके अनुसार, “मार्केट कपलिंग लागू होने से एक समान कीमत तय होगी, बाजार अधिक पारदर्शी बनेगा और निवेश को बढ़ावा मिलेगा।”
विशेषज्ञों का मानना है कि मार्केट कपलिंग लागू होने के बाद भारत का पावर मार्केट अधिक स्थिर, प्रतिस्पर्धी और कुशल बनेगा, जिससे उपभोक्ताओं और वितरण कंपनियों दोनों को लंबे समय में फायदा मिलेगा।



