रायपुर, 27 अप्रैल 2026। अब कॉर्पोरेट जगत में मुनाफे के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण भी विकास का अहम आधार बनता जा रहा है। इसी दिशा में वेदांता एल्युमीनियम ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए यह संकेत दिया है कि उसका भविष्य केवल औद्योगिक विस्तार तक सीमित नहीं, बल्कि प्रकृति के संरक्षण के साथ संतुलित विकास पर आधारित होगा।

कंपनी को वर्ष 2025 में आने वाली अपनी पहली टास्क फोर्स ऑन नेचर-रिलेटेड फाइनेंशियल डिस्क्लोजर (TNFD) रिपोर्ट के लिए ‘अर्ली अडॉप्टर’ के रूप में मान्यता मिली है। साथ ही, कंपनी ने वर्ष 2050 तक ‘नेट ज़ीरो लॉस’ का लक्ष्य दोहराते हुए स्पष्ट किया है कि उसके निर्णयों में अब जैव-विविधता और प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा भी प्रमुख भूमिका निभाएगी।
कंपनी के सीईओ राजीव कुमार ने कहा कि “हमारा उद्देश्य केवल विकास नहीं, बल्कि जिम्मेदारी के साथ सतत विकास सुनिश्चित करना है, जिससे आने वाली पीढ़ियों को भी इसका लाभ मिल सके।”
जमीनी स्तर पर भी इसके सकारात्मक परिणाम देखने को मिल रहे हैं। अब तक कंपनी 29 लाख से अधिक पौधरोपण कर चुकी है और वर्ष 2030 तक 70 लाख पेड़ लगाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके अलावा बांस बागान, औषधीय पौधों का रोपण और कृत्रिम घोंसलों जैसी जैव-विविधता बढ़ाने वाली पहलें भी लगातार जारी हैं।
पर्यावरणीय संतुलन को ध्यान में रखते हुए कंपनी ने ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कमी, 1.57 अरब यूनिट नवीकरणीय ऊर्जा के उपयोग और 100 प्रतिशत फ्लाई ऐश के पुनः उपयोग जैसे कदम भी उठाए हैं।
इन प्रयासों के चलते वेदांता एल्युमीनियम को न केवल देश में, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी एक जिम्मेदार और पर्यावरण-संवेदनशील उद्योग के रूप में पहचान मिल रही है।



