रायपुर, 05 मई 2026

देश के 5 राज्यों में हुए विधानसभा चुनावों के नतीजे सामने आने के बाद सबसे ज्यादा चर्चा पश्चिम बंगाल की जीत को लेकर हो रही है। भारतीय जनता पार्टी की इस सफलता के पीछे सिर्फ नतीजे ही नहीं, बल्कि जमीनी रणनीति भी चर्चा का केंद्र बनी हुई है। खास बात यह रही कि इस चुनाव में छत्तीसगढ़ के नेताओं ने पर्दे के पीछे रहकर अहम भूमिका निभाई।
छत्तीसगढ़ भाजपा के संगठन महामंत्री पवन साय को बंगाल की 56 विधानसभा सीटों की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। उनका फोकस सिर्फ प्रचार तक सीमित नहीं था, बल्कि बूथ मैनेजमेंट, कार्यकर्ताओं की सक्रियता और वोटिंग पैटर्न को साधने तक रहा।
ग्राउंड लेवल पर संगठन खड़ा करना और हर बूथ तक नेटवर्क मजबूत करना उनकी रणनीति का अहम हिस्सा रहा।
दुर्गापुर जिले के अंतर्गत बर्धमान और दुर्गापुर लोकसभा क्षेत्रों की जिम्मेदारी पूर्व मंत्री राजेश मूणत और वरिष्ठ नेता शिवरतन शर्मा को दी गई।
इन दोनों क्षेत्रों की 14 विधानसभा सीटों पर क्लस्टर आधारित रणनीति लागू की गई। इनके साथ समन्वय के लिए भूपेन्द्र सवन्नी को लगाया गया, जबकि दक्षिण बर्धमान सीट पर विशेष फोकस किया गया।
कोलकाता क्लस्टर में अलग माइक्रो मैनेजमेंट टीम बनाई गई, जिसकी कमान संजय श्रीवास्तव और सौरभ सिंह के पास रही।
इस टीम ने प्रोफेशन आधारित आउटरीच पर काम किया—व्यापारी, डॉक्टर, सीए, प्रोफेसर, कलाकार, रिक्शा चालक, मछली विक्रेता जैसे अलग-अलग वर्गों तक पहुंच बनाई गई।
टीम को निर्देश था कि हर वर्ग के लिए अलग रणनीति अपनाई जाए।
इसी के तहत छोटे व्यापारियों से लेकर प्रोफेशनल वर्ग और असंगठित क्षेत्र तक संपर्क किया गया, जिससे वोट बैंक को प्रभावित करने में मदद मिली।
रणनीति का एक अहम हिस्सा उन स्थानीय नेताओं को फिर से एक्टिव करना था, जो पहले चुनाव हार चुके थे लेकिन जिनका जनाधार अब भी मजबूत था।
कोलकाता, हावड़ा, हुगली और नादिया जैसे क्षेत्रों में इस नेटवर्क का प्रभाव देखने को मिला।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की रैलियों और सभाओं के सफल आयोजन की जिम्मेदारी छत्तीसगढ़ के 4 मंत्रियों—विजय शर्मा, केदार कश्यप, गजेन्द्र यादव और टंकराम वर्मा—को दी गई थी।
इनकी भूमिका में रैली स्थल की तैयारी, स्थानीय समन्वय और कार्यक्रम प्रबंधन शामिल था।
बूथ मैनेजमेंट से लेकर क्लस्टर और माइक्रो लेवल तक छत्तीसगढ़ के नेताओं को जिस तरह जिम्मेदारी दी गई, उससे साफ संकेत मिलता है कि संगठन को उनकी कार्यशैली पर भरोसा है।
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, भाजपा चुनाव को संगठनात्मक ताकत के आधार पर लड़ती है, जहां अलग-अलग राज्यों के नेताओं को जिम्मेदारी देकर समन्वय बनाया जाता है।
यह भी माना जा रहा है कि पार्टी नेतृत्व को छत्तीसगढ़ के नेताओं की क्षमता और कार्यशैली की अच्छी समझ है, इसी वजह से उन्हें इतने बड़े स्तर पर तैनात किया गया।
बंगाल जीत के बाद छत्तीसगढ़ में भी जश्न का माहौल देखने को मिला। रायपुर, बिलासपुर, भिलाई और रायगढ़ सहित कई शहरों में कार्यकर्ताओं ने मिठाइयां बांटी, आतिशबाजी की और ढोल-नगाड़ों पर जश्न मनाया।
कुछ जगहों पर झालमुड़ी बांटकर भी जीत का जश्न मनाया गया।
पश्चिम बंगाल की इस जीत में छत्तीसगढ़ भाजपा के नेताओं की रणनीतिक भूमिका ने यह संकेत दे दिया है कि अब प्रदेश नेतृत्व राष्ट्रीय स्तर पर भी मजबूत पकड़ बना रहा है। बूथ से लेकर माइक्रो मैनेजमेंट तक की इस प्लानिंग ने चुनावी नतीजों में बड़ा फर्क पैदा किया।



