नई दिल्ली, 09 मई 2026। केंद्र सरकार ने देश के शीर्ष सैन्य पद चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) के लिए लेफ्टिनेंट जनरल एन.एस. राजा सुब्रमणि को नियुक्त किया है। वह वर्तमान CDS अनिल चौहान का स्थान लेंगे, जिनका कार्यकाल 30 मई को समाप्त हो रहा है। यह नियुक्ति भारतीय सशस्त्र बलों के शीर्ष नेतृत्व में एक महत्वपूर्ण बदलाव माना जा रहा है।

रक्षा मंत्रालय के अनुसार, लेफ्टिनेंट जनरल एनएस राजा सुब्रमणि पदभार ग्रहण करने के बाद सैन्य मामलों के विभाग में भारत सरकार के सचिव के रूप में भी कार्य करेंगे। CDS के रूप में उनकी भूमिका तीनों सेनाओं—थल सेना, नौसेना और वायु सेना—के बीच बेहतर समन्वय और एकीकरण सुनिश्चित करने की होगी।
लेफ्टिनेंट जनरल राजा सुब्रमणि वर्तमान में राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय में सैन्य सलाहकार के पद पर कार्यरत हैं। इससे पहले उन्होंने जुलाई 2024 से जुलाई 2025 तक सेना के उप प्रमुख के रूप में सेवाएं दी थीं।
दिसंबर 1985 में गढ़वाल राइफल्स से कमीशन प्राप्त करने वाले राजा सुब्रमणि ने लगभग चार दशकों तक भारतीय सेना में विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया है। उन्होंने सेंट्रल कमांड के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ, नॉर्दर्न कमांड के चीफ ऑफ स्टाफ, II कोर के कमांडर और मिलिट्री इंटेलिजेंस के डिप्टी डायरेक्टर जनरल जैसे महत्वपूर्ण पदों पर जिम्मेदारी निभाई है।
अपने सैन्य करियर के दौरान उन्होंने असम में उग्रवाद विरोधी ऑपरेशन ‘ऑपरेशन राइनो’ में अहम भूमिका निभाई। इसके अलावा उन्होंने जम्मू-कश्मीर और अन्य संवेदनशील क्षेत्रों में भी महत्वपूर्ण कमांड संभाली।
उन्होंने 17 माउंटेन डिवीजन, 168 इन्फैंट्री ब्रिगेड और 2 कोर जैसे रणनीतिक सैन्य यूनिट्स का नेतृत्व किया है। पश्चिमी मोर्चे पर भी उन्होंने भारतीय सेना के स्ट्राइक कोर का नेतृत्व किया।
लेफ्टिनेंट जनरल एनएस राजा सुब्रमणि ने राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA) और भारतीय सैन्य अकादमी (IMA) से प्रशिक्षण प्राप्त किया है। इसके अलावा उन्होंने किंग्स कॉलेज लंदन से मास्टर डिग्री और मद्रास विश्वविद्यालय से एम.फिल. किया है।
उनकी विशिष्ट सेवाओं के लिए उन्हें परम विशिष्ट सेवा पदक (PVSM), अति विशिष्ट सेवा पदक (AVSM), सेना पदक (SM) और विशिष्ट सेवा पदक (VSM) से सम्मानित किया गया है।
बिपिन रावत और जनरल अनिल चौहान के बाद एनएस राजा सुब्रमणि भारत के तीसरे CDS होंगे। CDS का पद देश की रक्षा प्रणाली में सर्वोच्च सैन्य समन्वय का केंद्र होता है और यह तीनों सेनाओं के बीच तालमेल बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।



