7 Oct 2026, Wed
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जमीन के काम में अब नहीं लगाने होंगे दफ्तरों के चक्कर: छत्तीसगढ़ में ‘ऑटो म्यूटेशन’ का कमाल, 99.95% मामलों का घर बैठे निपटारा

सतीश शर्मा 

रायपुर, 08 जुलाई 2026

सुशासन के नए डिजिटल युग में राजस्व प्रशासन अब फाइलों और लंबित प्रकरणों के पारंपरिक चक्रव्यूह से बाहर निकल चुका है। राज्य शासन के राजस्व, आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विभाग ने तकनीक को माध्यम बनाकर जमीन से जुड़ी सेवाओं का पूरी तरह कायाकल्प कर दिया है। ‘ऑटो म्यूटेशन’ (स्वतः नामांतरण) और ‘ऑटो डायवर्सन’ (स्वतः व्यवर्तन) जैसी जनहितैषी व्यवस्थाओं ने विभाग को तेज, पारदर्शी और मानवीय हस्तक्षेप से मुक्त बनाया है। इससे आम नागरिकों को दफ्तरों के चक्कर, लंबे इंतजार और मानसिक व शारीरिक प्रताड़ना से स्थायी मुक्ति मिली है।

पहले रजिस्ट्री के बाद नामांतरण के लिए अलग से आवेदन और भौतिक सत्यापन की थकाऊ प्रक्रिया से गुजरना पड़ता था, लेकिन छत्तीसगढ़ सरकार की मजबूत इच्छाशक्ति से अब यह स्वतः संपन्न हो रहा है। इसके साथ ही भूमि उपयोग परिवर्तन (डायवर्सन) के लिए आवेदन, प्रीमियम निर्धारण और शुल्क गणना को भी आधुनिक तकनीक से त्रुटिहीन बनाया गया है। छत्तीसगढ़ का यह डिजिटल गवर्नेंस मॉडल आज देश के लिए एक अनुकरणीय उदाहरण बनकर उभरा है।

आंकड़ों की जुबानी: सफलता की एक नई गाथा

राजस्व विभाग द्वारा जारी प्रामाणिक आंकड़े इस ऐतिहासिक परिवर्तन की गवाही देते हैं। राज्य में अब तक कुल 1,40,607 पंजीकृत विलेखों में से रिकॉर्ड 1,40,536 मामलों का सफलतापूर्वक ऑटो म्यूटेशन किया जा चुका है। संपूर्ण प्रदेश में केवल 71 प्रकरण प्रक्रियाधीन हैं, जिससे विभाग ने 99.95 प्रतिशत की अभूतपूर्व सफलता दर हासिल की है।

वहीं दूसरी ओर, ऑटो डायवर्सन व्यवस्था के तहत कुल 5,661 आवेदन दर्ज किए गए, जिनमें से 4,739 मामलों का त्वरित निराकरण किया गया। इस प्रकार 83.71 प्रतिशत प्रकरणों का निस्तारण कर यह साबित कर दिया गया कि जटिल तकनीकी प्रक्रियाओं को भी डिजिटल माध्यम से सुगम और पारदर्शी बनाया जा सकता है। राजस्व सेवाएँ सीधे नागरिक के जीवन, संपत्ति और निवेश से जुड़ी होती हैं, इसलिए इनमें गति आने से राज्य की आवासीय, वाणिज्यिक और औद्योगिक गतिविधियों को नई रफ्तार मिली है।

ऑटो म्यूटेशन ने बदली नामांतरण की तस्वीर

किसी भी संपत्ति की रजिस्ट्री के बाद भू-अभिलेखों में नाम दर्ज होना एक अनिवार्य प्रक्रिया है। पहले पटवारी और तहसील कार्यालयों के चक्कर काटना, दस्तावेजों की जांच में महीनों गंवाना और अनिश्चितता का सामना करना आम बात थी, जिससे भ्रष्टाचार को भी बढ़ावा मिलता था।

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आज छत्तीसगढ़ की तस्वीर बदल चुकी है। 1,40,607 पंजीकृत विलेखों में से 1,40,536 मामलों का स्वतः नामांतरण होना यह दर्शाता है कि अब नागरिक को अपने हक के लिए संघर्ष नहीं करना पड़ रहा है। इस व्यवस्था से समय और धन की भारी बचत हो रही है और रिकॉर्ड रीयल-टाइम अपडेट होने से जमीन से जुड़े धोखाधड़ी के मामलों पर लगाम लगी है।

इस सफलता को बनाए रखने के लिए राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC) द्वारा एक सख्त तकनीकी लॉक सिस्टम विकसित किया गया है। इसके तहत यदि किसी संपत्ति का एक भी पुराना ऑटो म्यूटेशन लंबित है, तो संबंधित सब-रजिस्ट्रार कार्यालय में उस संपत्ति की अगली रजिस्ट्री तब तक नहीं हो पाएगी, जब तक पिछला म्यूटेशन क्लियर न हो जाए। यह कदम निचले स्तर के प्रशासनिक अमले को जवाबदेह बनाता है।

ऑटो डायवर्सन से भूमि उपयोग परिवर्तन की प्रक्रिया हुई तेज

कृषि भूमि को आवासीय, वाणिज्यिक या औद्योगिक उपयोग में बदलना (डायवर्सन) शहरीकरण, निवेश और रोजगार सृजन की रीढ़ है। पहले आवेदकों को शुल्क, आवश्यक दस्तावेजों और समय सीमा की स्पष्ट जानकारी नहीं होती थी।

फरवरी से जून 2026 के बीच 5,661 आवेदनों में से 4,739 का त्वरित निस्तारण यह दिखाता है कि विभाग ने गाइडलाइन दरों के आधार पर प्रीमियम निर्धारण जैसी पेचीदा प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित कर दिया है। वर्तमान में 922 लंबित मामलों के पीछे अपूर्ण दस्तावेज, चालान राशि में तकनीकी अंतर या TNCP के मास्टर प्लान से भिन्न प्रयोजन जैसे व्यावहारिक कारण हैं। इन चुनौतियों को सार्वजनिक करना विभाग की पारदर्शिता और विश्वसनीयता को दर्शाता है।

जिला-वार प्रदर्शन ने दिखाई नई प्रशासनिक संस्कृति

ऑटो डायवर्सन के क्रियान्वयन में जिलों के बीच स्वस्थ और परिणाम-उन्मुख प्रतिस्पर्धा देखने को मिल रही है।

  • कोरिया: 59 में 59 प्रकरणों का निस्तारण, 100 प्रतिशत सफलता, राज्य में प्रथम स्थान।
  • कोरबा: 98.46 प्रतिशत सफलता दर।
  • मुंगेली: 94.16 प्रतिशत मामलों का निपटारा।
  • बालोद: 93.72 प्रतिशत निस्तारण दर।
  • धमतरी: 165 में 153 प्रकरणों का वैधानिक निराकरण, 92.73 प्रतिशत सफलता के साथ राज्य में पांचवां (टॉप-5) स्थान।
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तकनीकी सुधार और नए डिजिटल मॉड्यूल्स

NGDRS API Integration: इसके माध्यम से सरकारी गाइडलाइन दरें सीधे पोर्टल से प्राप्त हो रही हैं, जिससे प्रीमियम निर्धारण पूरी तरह स्वचालित और पारदर्शी हो गया है।

‘Diverted to Diverted’ मॉड्यूल

यदि पहले से डायवर्टेड भूमि का आंतरिक उपयोग बदलना हो (जैसे आवासीय से वाणिज्यिक), तो इस मॉड्यूल के तहत 15 दिनों की समय सीमा तय की गई है।

‘मल्टीपल खसरा’ मॉड्यूल

एक से अधिक खसरों वाली भूमि के लिए अब एक ही आवेदन, स्वतः शुल्क गणना और ई-चालान की सुविधा मिलेगी। इसके लिए समय सीमा जुलाई 2026 निर्धारित की गई है।

‘रिकवरी’ मॉड्यूल

पुराने लंबित मामलों के निपटारे के लिए पूर्व भुगतानों की प्रविष्टि, शेष प्रीमियम की गणना, भू-राजस्व/उपकर की मांग तथा रिकवरी डैशबोर्ड की व्यवस्था की जाएगी। इसके लिए समय सीमा अगस्त 2026 तय की गई है।

सुशासन का नया मॉडल बनता छत्तीसगढ़

यह ऐतिहासिक बदलाव केवल तकनीकी आंकड़ों का नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के पौने तीन करोड़ नागरिकों के जीवन को सरल और सुरक्षित बनाने का माध्यम है। किसान, गृहस्वामी, व्यापारी और औद्योगिक निवेशक अब घर बैठे अपने मोबाइल पर पारदर्शी राजस्व सेवाओं का लाभ उठा रहे हैं।

दिसंबर 2026 तक तय रोडमैप के अनुसार राज्य के सभी क्षेत्रों की सैटेलाइट/ड्रोन मैपिंग, TNCP से NOC लिंकिंग और मुख्य भू-अभिलेख पोर्टल का व्यापक अपग्रेडेशन किया जाएगा। ये कदम छत्तीसगढ़ को डिजिटल राजस्व प्रशासन के क्षेत्र में राष्ट्रीय बेंचमार्क के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होंगे। तकनीक, संवेदनशीलता और जवाबदेही के इस प्रभावी समन्वय से छत्तीसगढ़ ने जन-केंद्रित सुशासन की नई मिसाल पेश की है।

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