7 Oct 2026, Wed

बिहान से बदली तकदीर : 5 हजार के लोन ने गढ़ी 4 लाख सालाना कमाई की कहानी, सुनीता वर्मा बनीं ग्रामीण महिला सशक्तिकरण की नई पहचान

रायपुर, 09 जुलाई 2026

कभी खेतों में मजदूरी कर परिवार चलाने वाली खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले के ग्राम टेकापारकला की सुनीता वर्मा आज ग्रामीण उद्यमिता की सशक्त पहचान बन चुकी हैं। महज 5 हजार रुपये के ऋण से शुरू हुआ उनका सफर आज करीब 4 लाख रुपये वार्षिक आय तक पहुंच चुका है। छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ और स्व-सहायता समूह से मिले सहयोग ने उनकी जिंदगी की तस्वीर ही बदल दी।

वर्ष 2017 में पद्म मां गायत्री स्व-सहायता समूह से जुड़ने के बाद सुनीता ने पहला ऋण लेकर सिलाई मशीन खरीदी और बैग सिलाई का काम शुरू किया। छोटी शुरुआत ने बड़ा सपना दिया। इसके बाद समूह से मिले 5 लाख रुपये के ऋण से उन्होंने कृषि भूमि और ट्रैक्टर खरीदा, जबकि 3 लाख रुपये के अतिरिक्त ऋण से ट्रॉली लेकर खेती और परिवहन कार्य को नई गति दी।

आज सुनीता सिर्फ किसान नहीं, बल्कि सफल ग्रामीण उद्यमी हैं। वे हल्दी, धनिया और मिर्च की खेती कर स्वयं मसाले तैयार करती हैं। इसके साथ ही अचार, बड़ी और पापड़ बनाकर सी-मार्ट, सरस मेला और विभिन्न बाजारों में बेच रही हैं। उनके उत्पादों की मांग अब छत्तीसगढ़ के बाहर आयोजित सरस मेलों तक पहुंच चुकी है। मसाला एवं खाद्य उत्पादों से ही उन्हें हर साल लगभग एक लाख रुपये की शुद्ध आय प्राप्त हो रही है।

खेती के क्षेत्र में भी उन्होंने उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। करीब सात एकड़ भूमि पर धान, गेहूं, चना, अरहर, मूंग, उड़द और सब्जियों की खेती कर वे प्रतिवर्ष लगभग डेढ़ लाख रुपये की शुद्ध आय अर्जित कर रही हैं। वहीं पिछले तीन वर्षों से ई-रिक्शा संचालन और वर्ष 2025 से शुरू की गई सब्जी नर्सरी ने उनकी आय में नया आयाम जोड़ दिया है।

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आज उनकी कुल वार्षिक आय करीब चार लाख रुपये तक पहुंच चुकी है। उन्होंने खैरागढ़-छुईखदान मुख्य मार्ग पर अपना पक्का मकान और दुकान भी स्थापित कर लिया है, जहां स्वयं निर्मित उत्पादों की बिक्री के साथ कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) संचालित कर ग्रामीणों को डिजिटल सेवाएं भी उपलब्ध करा रही हैं।

सुनीता वर्मा की सफलता इस बात का प्रमाण है कि यदि महिलाओं को सही मार्गदर्शन, वित्तीय सहयोग और अवसर मिले तो वे आर्थिक आत्मनिर्भरता के साथ समाज में परिवर्तन की मजबूत आधारशिला बन सकती हैं। आज वे अपने क्षेत्र की सैकड़ों महिलाओं के लिए प्रेरणा हैं और भविष्य में पशुपालन को जोड़कर अपने व्यवसाय का और विस्तार करने की तैयारी कर रही हैं।

बिहान योजना ने जहां उन्हें अवसर दिया, वहीं उनकी मेहनत, आत्मविश्वास और संघर्ष ने उस अवसर को सफलता की मिसाल में बदल दिया। सुनीता वर्मा की यह कहानी ग्रामीण भारत में महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता की जीवंत तस्वीर बनकर उभरी है।

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