सतीश शर्मा
रायपुर, 09 जुलाई 2026। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020, निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम-2009 तथा शिक्षा मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के अनुरूप छत्तीसगढ़ सरकार ने स्कूल प्रवेश व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया है। अब अगले शैक्षणिक सत्र से प्रदेश के सभी स्कूलों में कक्षा पहली में प्रवेश के लिए न्यूनतम आयु 6 वर्ष निर्धारित कर दी गई है। इस संबंध में स्कूल शिक्षा सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह ने सभी संबंधित विभागों और जिला शिक्षा अधिकारियों को आवश्यक निर्देश जारी कर दिए हैं।
1 अप्रैल के आधार पर तय होगी आयु, सभी कक्षाओं के लिए अलग नियम
जारी निर्देशों के अनुसार बच्चों के फाउंडेशनल स्टेज को मजबूत बनाने और प्रवेश प्रक्रिया में एकरूपता लाने के लिए संबंधित शैक्षणिक सत्र की 1 अप्रैल को बच्चे की आयु को आधार माना जाएगा।

नई व्यवस्था के तहत:
- नर्सरी (बालवाटिका-1) : 3 वर्ष से अधिक एवं 4 वर्ष से कम
- केजी-1 (बालवाटिका-2) : 4 वर्ष से अधिक एवं 5 वर्ष से कम
- केजी-2 (बालवाटिका-3) : 5 वर्ष से अधिक एवं 6 वर्ष से कम
- कक्षा पहली : 6 वर्ष से अधिक एवं 7 वर्ष से कम
3 महीने की विशेष छूट भी मिलेगी
सरकार ने अभिभावकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए 3 महीने की विशेष छूट भी दी है। यदि कोई बच्चा 1 अप्रैल तक निर्धारित आयु पूरी नहीं कर पाता, लेकिन 1 जुलाई तक उसकी आवश्यक आयु पूरी हो जाती है, तो उसे अधिकतम तीन माह की छूट देते हुए संबंधित कक्षा में प्रवेश दिया जा सकेगा।
सरकारी, निजी और अनुदान प्राप्त सभी स्कूलों में लागू होगा नियम
यह नई व्यवस्था प्रदेश के सभी शासकीय, अशासकीय (निजी) तथा अनुदान प्राप्त विद्यालयों में समान रूप से लागू होगी। इसके अलावा शिक्षा का अधिकार (RTE) के तहत निजी स्कूलों की 25 प्रतिशत आरक्षित सीटों पर होने वाले प्रवेश भी इसी नियम के अनुसार किए जाएंगे।
इन छात्रों को मिलेगा नियम से राहत
विभाग के निर्देशों के मुताबिक, जो विद्यार्थी किसी मान्यता प्राप्त विद्यालय की पूर्व-प्राथमिक (Pre-Primary) कक्षा से प्रोन्नत होकर सीधे कक्षा पहली में प्रवेश ले रहे हैं, उन पर यह नई आयु सीमा लागू नहीं होगी। ऐसे छात्रों को उनके स्थानांतरण प्रमाण-पत्र (TC), अंकसूची या स्कोर कार्ड में दर्ज जन्मतिथि के आधार पर प्रवेश दिया जाएगा।
सख्ती से पालन और व्यापक प्रचार के निर्देश
स्कूल शिक्षा विभाग ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे विकासखंड शिक्षा अधिकारियों, संकुल समन्वयकों और सभी शाला प्रमुखों के माध्यम से इन नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित कराएं। साथ ही अभिभावकों की सुविधा के लिए नए नियमों का व्यापक प्रचार-प्रसार करने के भी निर्देश दिए गए हैं।




