15 Oct 2026, Thu
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नकटी मामले को लेकर विपक्ष का स्थगन : नेता प्रतिपक्ष बोले : “गरीबों के मकान संविधान के खिलाफ तोड़े गए”, कैबिनेट मंत्री टंकराम वर्मा का जवाब : “कार्रवाई वैधानिक और संवैधानिक रूप से हुई”, स्थगन अस्वीकार किया गया

रायपुर, 15 जुलाई 2026

छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के तीसरे दिन नकटी गांव में प्रशासन की कार्रवाई को लेकर सदन में जोरदार टकराव देखने को मिला। कांग्रेस ने इस मुद्दे पर स्थगन प्रस्ताव लाकर सरकार को घेरने की कोशिश की, लेकिन सरकार का पक्ष सुनने के बाद विधानसभा अध्यक्ष ने प्रस्ताव को अग्राह्य (अस्वीकार) कर दिया। इसके बाद सत्ता और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक हुई।

नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने आरोप लगाया कि नकटी गांव में प्रशासन ने संविधान की भावना के विपरीत गरीबों के मकानों पर बुलडोजर चलाया। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के इतिहास में इस तरह की कार्रवाई पहले कभी नहीं हुई और सरकार गरीबों के अधिकारों का हनन कर रही है।

कांग्रेस विधायक उमेश पटेल ने सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि यदि कार्रवाई चार महीने बाद होती तो कोई फर्क नहीं पड़ता, लेकिन मानसून के बीच लोगों को बेघर करना अमानवीय है। उन्होंने दावा किया कि कार्रवाई में प्रधानमंत्री आवास योजना के 13 मकान तोड़ दिए गए और चार गायों की भी मौत हो गई।

विधायक देवेंद्र यादव ने आरोप लगाया कि पूरी कार्रवाई सुनियोजित तरीके से की गई और प्रशासन ने मानवीय संवेदनाओं को पूरी तरह नजरअंदाज किया।

विपक्ष के आरोपों पर जवाब देते हुए राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने स्पष्ट किया कि नकटी गांव में कार्रवाई शिकायतों के आधार पर की गई। उन्होंने कहा कि प्रशासन ने सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया और पूरी कार्रवाई वैधानिक एवं संवैधानिक दायरे में हुई है। सरकार ने विपक्ष के सभी आरोपों को निराधार बताया।

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सरकार का पक्ष सुनने के बाद विधानसभा अध्यक्ष ने कांग्रेस के स्थगन प्रस्ताव को अग्राह्य घोषित कर दिया, जिससे सदन की कार्यवाही निर्धारित एजेंडे के अनुसार आगे बढ़ी।

इस दौरान भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने कांग्रेस पर पलटवार करते हुए कहा कि विपक्ष जनता को गुमराह कर सरकार की छवि खराब करने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने कहा कि जिस कार्रवाई को लेकर कांग्रेस आज सवाल उठा रही है, उसकी प्रक्रिया तो उनकी ही सरकार के कार्यकाल में शुरू हुई थी।

नकटी गांव का मुद्दा विधानसभा में सत्ता और विपक्ष के बीच बड़ा राजनीतिक संघर्ष बनकर उभरा। कांग्रेस जहां इसे गरीबों और संविधान के अधिकारों पर हमला बता रही है, वहीं भाजपा सरकार इसे पूरी तरह कानूनी कार्रवाई बताते हुए विपक्ष पर राजनीतिक लाभ लेने का आरोप लगा रही है। आने वाले दिनों में यह मामला सदन से लेकर सड़क तक सियासी बहस का केंद्र बना रह सकता है।

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