सतीश शर्मा
रायपुर, 16 जुलाई 2026। छत्तीसगढ़ डायोसिस बोर्ड ऑफ एजुकेशन (CDBE) ने संस्था से जुड़े विवादों और लगाए जा रहे आरोपों पर विस्तृत प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए कहा है कि “सत्य परेशान हो सकता है, पराजित नहीं।” संस्था का कहना है कि पिछले कुछ समय से उसके विरुद्ध भ्रामक जानकारियां और आरोप सार्वजनिक किए जा रहे हैं, जिससे शिक्षकों, कर्मचारियों, विद्यार्थियों, अभिभावकों और समाज के बीच भ्रम की स्थिति बनी है।
प्रेस विज्ञप्ति में संस्था ने कहा कि कुछ व्यक्तियों द्वारा बिशप, सचिव और अन्य वैधानिक पदाधिकारियों के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए गए तथा ऐसे दस्तावेज प्रस्तुत किए गए, जिन्हें संस्था ने भ्रामक, अपूर्ण या वास्तविक अभिलेखों से मेल न खाने वाला बताया है। संस्था का दावा है कि इन दावों के आधार पर उसकी छवि धूमिल करने का प्रयास किया गया।

डायोसिस ने स्पष्ट किया कि किसी भी संस्था का संचालन उसके वैधानिक संविधान, पंजीकृत अभिलेखों और सक्षम प्राधिकारी के आदेशों के अनुसार होता है। व्यक्तिगत दावे, अफवाहें या सार्वजनिक बयान किसी भी वैधानिक अधिकार का स्थान नहीं ले सकते।
संस्था ने कहा कि उपलब्ध आधिकारिक अभिलेखों और प्रशासनिक प्रक्रियाओं से यह स्पष्ट है कि किसी भी विवाद का समाधान केवल कानून और प्रमाणों के आधार पर ही संभव है। यदि किसी व्यक्ति द्वारा कूटरचित, भ्रामक या असत्य दस्तावेजों का उपयोग किया गया है, तो ऐसे मामलों पर सक्षम न्यायालयों और वैधानिक प्राधिकारियों के समक्ष विधि अनुसार कार्रवाई चल रही है या प्रस्तुत की जा रही है।
प्रेस विज्ञप्ति में संस्था ने शिक्षकों, कर्मचारियों, अभिभावकों और समाज से अपील की है कि किसी भी सूचना पर विश्वास करने से पहले उसके आधिकारिक स्रोत, सक्षम प्राधिकारी के आदेश और प्रमाणित अभिलेखों की जांच अवश्य करें। संस्था ने कहा कि उसका उद्देश्य किसी के प्रति दुर्भावना रखना नहीं, बल्कि संस्था की गरिमा, कानून के शासन और सत्य की प्रतिष्ठा बनाए रखना है।
विज्ञप्ति के अंत में संस्था ने संदेश दिया कि “झूठ कुछ समय तक शोर मचा सकता है, लेकिन सत्य को पराजित नहीं कर सकता। समय, कानून और प्रमाण अंततः सत्य के पक्ष में खड़े होते हैं।”





