21 Jul 2026, Tue

संसद में पहले ही दिन सरकार-विपक्ष आमने-सामने: खड़गे ने छात्रों की आवाज दबाने का लगाया आरोप, जजों की संख्या बढ़ाने वाला बिल पेश

नई दिल्ली, 20 जुलाई 2026

संसद के मानसून सत्र 2026 का पहला दिन सोमवार को तीखी राजनीतिक नोकझोंक और हंगामे के साथ शुरू हुआ। राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने NEET-UG पेपर लीक और जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर कथित लाठीचार्ज का मुद्दा उठाते हुए सरकार पर छात्रों की आवाज दबाने का आरोप लगाया। वहीं लोकसभा में विपक्षी सांसदों ने NEET पेपर लीक, राम मंदिर चढ़ावा चोरी सहित कई मुद्दों पर चर्चा की मांग करते हुए नारेबाजी की, जिसके चलते दोनों सदनों की कार्यवाही कुछ समय के लिए स्थगित करनी पड़ी।

इसी बीच कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने लोकसभा में सुप्रीम कोर्ट (जजों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026 पेश किया। इस विधेयक के जरिए सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या 34 से बढ़ाकर 38 करने का प्रावधान किया गया है। यह विधेयक मई में जारी अध्यादेश का स्थान लेगा। सरकार के अनुसार बढ़ी हुई संख्या के आधार पर पहले ही पांच नए न्यायाधीश नियुक्त किए जा चुके हैं।

 

 

सत्र की शुरुआत से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद परिसर में मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि “मानसून हो या मानसून सत्र, यदि दोनों प्रो-एक्टिव हों तो देश के लिए प्रोडक्टिव साबित होते हैं। संसद में तर्क और तथ्यों के साथ सकारात्मक चर्चा होनी चाहिए तथा हर आवाज का सम्मान होना चाहिए।” उन्होंने भारत के युवाओं और अंतरिक्ष क्षेत्र में स्टार्टअप्स की उपलब्धियों का भी उल्लेख किया।

राज्यसभा में मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि लाखों छात्रों का भविष्य दांव पर लगा है और जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर बल प्रयोग किया गया। उन्होंने सरकार से इस मुद्दे पर सदन में विस्तृत चर्चा कराने की मांग की। दूसरी ओर समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने भी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि जो सरकार श्रद्धांजलि देने में भी भेदभाव करे, उससे बड़ी संवेदनहीनता क्या हो सकती है।

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मानसून सत्र के पहले दिन सरकार ने कई महत्वपूर्ण विधेयकों को आगे बढ़ाने की तैयारी की। इनमें वंदे मातरम् को कानूनी संरक्षण देने वाला संशोधन विधेयक भी शामिल है। प्रस्तावित संशोधन के अनुसार राष्ट्रगीत का अपमान, उसमें बाधा डालना या उसका अनादर करना दंडनीय अपराध होगा, जिसके लिए जेल और जुर्माने का प्रावधान किया जा सकता है।

सरकार ने इस सत्र के लिए सात प्रमुख विधेयकों की सूची जारी की है। हालांकि एक देश-एक चुनाव, परिसीमन और महिला आरक्षण से जुड़े संविधान संशोधन विधेयकों पर अभी सहमति नहीं बन पाई है और इन्हें लेकर सरकार विपक्षी दलों का समर्थन जुटाने में लगी हुई है।

सत्र के पहले दिन प्रधानमंत्री मोदी, राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे सहित कई वरिष्ठ नेता संसद पहुंचे। सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ने अपने-अपने मुद्दों को लेकर रणनीति बनाई। पहले ही दिन हुए हंगामे से साफ संकेत मिल रहे हैं कि मानसून सत्र के दौरान NEET पेपर लीक, कानून व्यवस्था, शिक्षा, न्यायपालिका और संवैधानिक संशोधनों जैसे मुद्दों पर सरकार और विपक्ष के बीच तीखी टक्कर देखने को मिल सकती है।

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