नारायणपुर, 03 अगस्त 2026

अबूझमाड़ के दुर्गम इलाकों में हर साल मानसून के दौरान उफनते नालों की वजह से गांवों का संपर्क टूट जाता है। इलाज, शिक्षा और रोजमर्रा की जरूरतों के लिए लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इस बार आईटीबीपी की 44वीं वाहिनी ने स्थानीय संसाधनों की मदद से अस्थायी लकड़ी के फुट ब्रिज बनाकर 14 गांवों के हजारों ग्रामीणों को बड़ी राहत दी है।
ओरछा ब्लॉक के 14 गांवों में बने अस्थायी पुल
आईटीबीपी के जवानों ने स्थानीय लकड़ी और उपलब्ध संसाधनों का उपयोग कर उफनते नालों पर अस्थायी फुट ब्रिज तैयार किए हैं। इन पुलों के बनने से ग्रामीणों और दोपहिया वाहन चालकों की आवाजाही फिर से शुरू हो गई है। जिन नालों को पार करना पहले जान जोखिम में डालने जैसा था, वहां अब लोग सुरक्षित तरीके से आ-जा रहे हैं।
हर मानसून में कट जाता था संपर्क
माओवादी प्रभावित अबूझमाड़ क्षेत्र में लंबे समय तक सड़क और स्थायी पुलों का विकास नहीं हो सका। बारिश के मौसम में गांव पूरी तरह अलग-थलग पड़ जाते थे। कई बार बीमार लोगों को चारपाई पर उठाकर नाले पार कराए जाते थे, जबकि बच्चों की पढ़ाई और ग्रामीणों की दैनिक जरूरतें भी प्रभावित होती थीं।
ग्रामीणों ने जताया आभार
ग्रामीण माड़वी भीमा ने बताया कि पहले बारिश आते ही गांव का संपर्क पूरी तरह टूट जाता था, लेकिन अब पुल बनने से काफी राहत मिली है। वहीं कुतुल गांव की हिडमे कवासी ने कहा कि बच्चों का स्कूल जाना पहले की तुलना में अब ज्यादा सुरक्षित हो गया है।
आईटीबीपी ने कहा—स्थायी पुल बनने तक रहेंगे सहारा
आईटीबीपी की 44वीं वाहिनी के सेनानी सिद्धिक पी.पी. ने कहा कि बल केवल सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि स्थानीय लोगों का जीवन आसान बनाने के लिए भी लगातार काम कर रहा है। उन्होंने बताया कि स्थायी पुल बनने तक ये अस्थायी फुट ब्रिज हजारों ग्रामीणों के लिए जीवनरेखा बने रहेंगे।





