3 Aug 2026, Mon

जांजगीर के सरकारी स्कूल में अंधविश्वास का खेल : बाली गुम होने पर बच्चों से कराया टोटका; शिक्षिका पर निलंबन की कार्रवाई

जांजगीर-चांपा। जिले के बलौदा विकासखंड स्थित शासकीय प्राथमिक शाला काठापाली में पदस्थ सहायक शिक्षिका गीता कुम्भकार को अंधविश्वास फैलाने और छात्रों में भय का माहौल बनाने के आरोप में तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) ने जांच रिपोर्ट के आधार पर यह कार्रवाई की।

जानकारी के अनुसार, 31 जुलाई को शिक्षिका की सोने की बाली स्कूल परिसर में गुम हो गई थी। बाली की तलाश के बजाय उन्होंने स्कूल के बच्चों को एकत्र कर लाल कपड़ा, पीला धागा, नारियल और चावल मंगवाकर कथित टोटका कराया। आरोप है कि इस दौरान बच्चों से कहा गया कि यदि किसी ने बाली के बारे में सही जानकारी नहीं दी तो उसे पेट दर्द, तेज बुखार या किसी बड़ी अनहोनी का सामना करना पड़ेगा।

शिक्षिका की इस हरकत से छोटे-छोटे बच्चे सहम गए। घर पहुंचकर बच्चों ने पूरी घटना अपने परिजनों को बताई, जिसके बाद गांव में आक्रोश फैल गया और मामले की शिकायत शिक्षा विभाग से की गई।

 

 

विकासखंड शिक्षा अधिकारी (BEO) की जांच में यह कृत्य वैज्ञानिक सोच और संवैधानिक मूल्यों के विपरीत पाया गया। जांच रिपोर्ट में कहा गया कि शिक्षिका के व्यवहार से विद्यालय में अंधविश्वास और भय का माहौल बना तथा विभाग की छवि भी प्रभावित हुई।

जिला शिक्षा अधिकारी ने शिक्षिका को पहले कारण बताओ नोटिस जारी किया था, लेकिन निर्धारित समय में जवाब नहीं मिलने पर छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 तथा छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1966 के नियम-9 के तहत उन्हें निलंबित कर दिया गया। निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय, बलौदा निर्धारित किया गया है।

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शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि शासकीय विद्यालयों में अंधविश्वास या बच्चों में भय पैदा करने जैसी गतिविधियों को किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा और ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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