बिलासपुर, 03 अगस्त 2026
छत्तीसगढ़ के बिलासपुर-रतनपुर-पेंड्रा मार्ग पर रविवार शाम बड़ा हादसा टल गया। बांसाझाल के पास स्थित 35 साल पुराना पुल अचानक बीच से दो हिस्सों में टूट गया। उसी समय पुल से गुजर रही एक यात्री बस का अगला हिस्सा टूटे हुए स्लैब के किनारे अटक गया, जिससे बस नदी में गिरने से बाल-बाल बच गई। राहत की बात यह रही कि बस में सवार सभी यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार घटना रविवार शाम करीब 5 बजे हुई। पुल टूटते ही मौके पर अफरा-तफरी मच गई और दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई। सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची तथा पुल के दोनों ओर बैरिकेडिंग कर यातायात पूरी तरह रोक दिया।
35 साल पुराना था पुल, बारिश के बाद बढ़ा खतरा
बताया जा रहा है कि बांसाझाल का यह पुल करीब 35 वर्ष पुराना था और लंबे समय से जर्जर स्थिति में था। लगातार बारिश के कारण इसकी हालत और खराब हो गई थी। पुल बिलासपुर-जबलपुर नेशनल हाईवे-45 परियोजना के अंतर्गत बन रही सड़क पर स्थित है, जहां करीब 510 करोड़ रुपये की लागत से सड़क निर्माण कार्य चल रहा है।
नई सड़क पर भी दिखीं दरारें
रतनपुर से पेंड्रा तक लगभग 97 किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण तीन चरणों में किया जा रहा है। पहली ही बारिश में सड़क के कई हिस्सों में लंबी दरारें, धंसाव और किनारों के टूटने जैसी शिकायतें सामने आई हैं। कई जगह डामर की परत 5 से 10 फीट तक फट गई है, जिससे निर्माण गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं।
कई जिलों और मध्यप्रदेश से संपर्क टूटा
पुल ध्वस्त होने के बाद पेंड्रा, गौरेला, अमरकंटक, मनेंद्रगढ़ के साथ-साथ मध्यप्रदेश के जबलपुर और शहडोल की ओर जाने वाला प्रमुख मार्ग पूरी तरह बंद हो गया है। यह उत्तर छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण मार्ग है, इसलिए यातायात और परिवहन व्यवस्था पर व्यापक असर पड़ा है।
प्रशासन ने जारी किए डायवर्जन रूट
घटना के बाद प्रशासन ने पुल के दोनों ओर आवागमन पूरी तरह बंद कर दिया है। यात्रियों और भारी वाहनों को वैकल्पिक मार्गों से भेजा जा रहा है। अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि अगली सूचना तक बिलासपुर-रतनपुर-पेंड्रा मार्ग का उपयोग न करें और प्रशासन द्वारा निर्धारित डायवर्जन रूट का ही पालन करें।
फिलहाल संबंधित विभाग पुल टूटने के कारणों की जांच कर रहा है। वहीं, सड़क निर्माण की गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों को लेकर भी सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय लोगों ने निर्माण कार्य की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।





