4 Aug 2026, Tue
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फोन नहीं उठाने पर भड़के विजय बघेल: दो निगम आयुक्तों के खिलाफ विशेषाधिकार हनन की शिकायत, लोकसभा सचिवालय ने मांगा जवाब

रायपुर, 04 अगस्त 2026। छत्तीसगढ़ में जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच बढ़ती दूरी अब बड़ा राजनीतिक और प्रशासनिक मुद्दा बनती जा रही है। रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल के बाद अब दुर्ग लोकसभा क्षेत्र के सांसद विजय बघेल ने भी दो नगर निगम आयुक्तों के खिलाफ लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष विशेषाधिकार हनन की शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत के बाद लोकसभा सचिवालय ने राज्य शासन और संबंधित अधिकारियों से जवाब तलब किया है, जिससे प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है।

सांसद विजय बघेल ने अपनी शिकायत में भिलाई नगर निगम के तत्कालीन आयुक्त राजीव कुमार पांडेय और भिलाई-चरोदा नगर निगम के आयुक्त डी.एस. राजपूत पर आरोप लगाया है कि उन्होंने कई बार संपर्क करने के बावजूद फोन नहीं उठाया और जनहित से जुड़े मामलों में अपेक्षित सहयोग नहीं दिया। सांसद का कहना है कि अधिकारियों के इस रवैये से जनता की समस्याओं का समय पर समाधान नहीं हो पा रहा है।

लोकसभा सचिवालय द्वारा मामले को गंभीरता से लेते हुए राज्य सरकार और संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगे जाने के बाद यह मामला चर्चा का विषय बन गया है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस पर प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई भी हो सकती है।

 

 

इससे पहले रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल और एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी के बीच फोन पर हुई बातचीत और कथित अभद्र व्यवहार का मामला भी सुर्खियों में रहा था। लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाओं ने जनप्रतिनिधियों और नौकरशाही के बीच समन्वय पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

राजनीतिक और प्रशासनिक जानकारों का मानना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनप्रतिनिधि जनता और प्रशासन के बीच महत्वपूर्ण कड़ी होते हैं। यदि अधिकारी जनप्रतिनिधियों से संवाद नहीं करेंगे तो विकास कार्यों की गति प्रभावित होगी और जनता की समस्याओं का निराकरण भी समय पर नहीं हो सकेगा।

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सांसद विजय बघेल ने कहा कि क्षेत्र की जनता अपनी समस्याओं के समाधान के लिए उन पर भरोसा करती है। ऐसे में संबंधित अधिकारियों से समन्वय करना उनकी जिम्मेदारी है, लेकिन जब अधिकारी फोन तक नहीं उठाते और आवश्यक जानकारी उपलब्ध नहीं कराते तो जनहित के कार्य बाधित होते हैं। इसी कारण उन्हें लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष विशेषाधिकार हनन की शिकायत दर्ज करानी पड़ी है।

अब सभी की नजर राज्य शासन और लोकसभा सचिवालय की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है। यदि मामले में शिकायत सही पाई जाती है तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ आगे की कार्रवाई की जा सकती है।

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