16 Oct 2026, Fri
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झीरम घाटी हमले में अब 5 सितंबर को आएगा फैसला, 11 आरोपियों पर चला ट्रायल, 101 गवाहों और दस्तावेजों के आधार पर तय होगा दोष

जगदलपुर, 31 अगस्त 2026। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित झीरम घाटी नक्सली हमले मामले में फैसला अब 5 सितंबर 2026 को सुनाया जाएगा। विशेष NIA अदालत ने सोमवार 31 अगस्त को आने वाले फैसले को पांच दिन के लिए टाल दिया है। इससे पहले मामले में आज फैसला आने की उम्मीद थी।

मामले में कुल 11 आरोपियों के खिलाफ ट्रायल चला। सुनवाई के दौरान एक आरोपी की मौत हो गई। अब शेष 10 आरोपियों के खिलाफ अदालत का फैसला आना है। अभियोजन पक्ष ने मामले में 101 गवाहों के बयान और विभिन्न दस्तावेजों को साक्ष्य के तौर पर पेश किया है।

10 अगस्त को हुई थी अंतिम बहस

विशेष NIA अदालत में मामले की अंतिम बहस 10 अगस्त को हुई थी। अभियोजन पक्ष ने पेश किए गए गवाहों और दस्तावेजों के आधार पर आरोप साबित होने की दलील दी, जबकि बचाव पक्ष ने आरोपों को चुनौती देते हुए अपनी बात रखी। दोनों पक्षों की बहस पूरी होने के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया था।

अब 5 सितंबर को अदालत के निर्णय पर सभी की नजरें टिकी हैं। झीरम घाटी हमला छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े और चर्चित नक्सली हमलों में शामिल है। इस मामले में लंबे समय से पीड़ित परिवार न्याय की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

25 मई 2013 को हुआ था हमला

झीरम घाटी हमला 25 मई 2013 को हुआ था। उस समय छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव होने वाले थे और कांग्रेस ने प्रदेश में परिवर्तन यात्रा शुरू की थी। सुकमा में कार्यक्रम के बाद कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं का काफिला जगदलपुर की ओर लौट रहा था।

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काफिले में करीब 25 गाड़ियां और लगभग 200 नेता-कार्यकर्ता शामिल थे। काफिले में तत्कालीन कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, उनके बेटे दिनेश पटेल, महेंद्र कर्मा, उदय मुदलियार और अन्य वरिष्ठ नेता मौजूद थे।

पेड़ गिराकर रोका काफिला, फिर शुरू हुई फायरिंग

दोपहर करीब 3:40 बजे काफिला झीरम घाटी पहुंचा। यहां नक्सलियों ने पेड़ गिराकर सड़क को बाधित कर दिया था। गाड़ियां रुकते ही बड़ी संख्या में नक्सलियों ने फायरिंग शुरू कर दी।

करीब डेढ़ घंटे तक गोलीबारी चली। हमले में नंदकुमार पटेल और उनके बेटे दिनेश पटेल समेत कई लोगों की मौत हुई। बाद में नक्सलियों ने काफिले की गाड़ियों को एक-एक करके चेक किया।

महेंद्र कर्मा की भी हत्या

नक्सलियों ने कांग्रेस नेता और सलवा जुडूम आंदोलन के प्रमुख चेहरों में शामिल महेंद्र कर्मा को भी निशाना बनाया। हमले के दौरान उनकी बेरहमी से हत्या कर दी गई। घटना में बड़ी संख्या में कांग्रेस नेताओं, कार्यकर्ताओं और सुरक्षाकर्मियों की जान गई थी।

हमले में नक्सलियों ने IED का भी इस्तेमाल किया था। पूरी घटना ने प्रदेश की राजनीति और सुरक्षा व्यवस्था को हिलाकर रख दिया था।

12 साल बाद भी फैसले का इंतजार

झीरम घाटी हमले के बाद से ही मामले की जांच और न्यायिक प्रक्रिया लंबे समय तक चली। पीड़ित परिवार लगातार इस मामले में हमले की पूरी सच्चाई सामने आने और दोषियों को सजा मिलने की मांग करते रहे हैं।

अब विशेष NIA अदालत के 5 सितंबर के फैसले से इस बहुचर्चित मामले की न्यायिक प्रक्रिया में एक अहम पड़ाव आने की उम्मीद है।

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