20 Oct 2026, Tue
Breaking

पत्नी ने बीमार सास से अलग रहने का बनाया दबाव, झूठे केस और 7 साल की दूरी; हाईकोर्ट ने तलाक मंजूर किया

बिलासपुर, 04 सितम्बर 2026। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने वैवाहिक विवाद और तलाक के एक मामले में अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा कि बीमार और बुजुर्ग माता-पिता से अलग रहने के लिए पति पर दबाव बनाना मानसिक क्रूरता की श्रेणी में आता है। साथ ही, पति के खिलाफ झूठे आपराधिक मुकदमे दर्ज कराना और लंबे समय तक अलग रहना भी वैवाहिक संबंधों में क्रूरता का आधार हो सकता है।

जस्टिस एनके चंद्रवंशी की अदालत ने पति की तलाक की याचिका स्वीकार करते हुए पेंड्रारोड की निचली अदालत के फैसले को रद्द कर दिया। निचली अदालत ने पति को तलाक देने से इनकार कर दिया था।

2014 में हुई थी शादी

मामला उत्तर प्रदेश के इटावा निवासी विवेक अग्रवाल से जुड़ा है। उनकी शादी 12 दिसंबर 2014 को पेंड्रारोड निवासी महिला से हुई थी। दोनों का एक बेटा भी है।

पति ने कोर्ट में आरोप लगाया था कि पत्नी छोटी-छोटी बातों को लेकर विवाद करती थी। वह पति पर उसकी बुजुर्ग और बीमार मां से अलग होकर रहने का दबाव बनाती थी। पति ने मां को अकेला छोड़ने से इनकार किया तो दोनों के बीच विवाद बढ़ता गया।

2019 में पत्नी मायके चली गई

पति के मुताबिक, 11 अगस्त 2019 को पत्नी उसकी सहमति के बिना घर से गहने और नकदी लेकर पेंड्रारोड स्थित मायके चली गई। उनका बच्चा इटावा में ही रह गया। पत्नी के वापस नहीं लौटने पर पति ने तलाक के लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

पति ने 2022 में पेंड्रारोड की निचली अदालत में क्रूरता के आधार पर तलाक की याचिका दायर की थी। सुनवाई के बाद 18 फरवरी 2025 को कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी।

पढ़ें   प्रधानमंत्री मोदी का राष्ट्र के नाम ऐतिहासिक संबोधन: ऑपरेशन सिंदूर से दहला पाकिस्तान, आतंकी ठिकानों पर बरसी तबाही, कश्मीर पर न चर्चा होगी न मध्यस्थता, अब आतंक को मिलेगा मुंहतोड़ जवाब

निचली अदालत के फैसले को हाईकोर्ट में दी चुनौती

निचली अदालत ने माना था कि पति पत्नी पर लगाए गए क्रूरता के आरोपों को पर्याप्त रूप से साबित नहीं कर पाया। इसके बाद पति ने इस फैसले को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में चुनौती दी।

मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने वैवाहिक संबंधों में पति के अपने बीमार माता-पिता के प्रति दायित्व को भी महत्वपूर्ण माना।

मां को छोड़ने से इनकार करना स्वाभाविक- हाईकोर्ट

हाईकोर्ट ने कहा कि शादी से नया परिवार जरूर बनता है, लेकिन इससे व्यक्ति अपने वृद्ध या बीमार माता-पिता के प्रति नैतिक और कानूनी जिम्मेदारियों से मुक्त नहीं हो जाता।

कोर्ट के मुताबिक, पति का अपनी बीमार मां को छोड़ने से इनकार करना स्वाभाविक है। बिना किसी उचित वजह के पति को उसकी बीमार मां से अलग करने की लगातार कोशिश करना पति के प्रति मानसिक क्रूरता मानी जा सकती है।

झूठे केस और 7 साल की दूरी भी बनी आधार

हाईकोर्ट ने मामले में लगातार विवाद, पति के खिलाफ झूठे आपराधिक मुकदमे और वर्ष 2019 से पति-पत्नी के अलग रहने की स्थिति को भी देखा। कोर्ट ने माना कि लंबे समय से अलग रहने और लगातार विवादों के कारण दोनों के बीच आपसी विश्वास और वैवाहिक संबंध पूरी तरह खत्म हो चुके हैं।

इन परिस्थितियों को देखते हुए हाईकोर्ट ने पति की तलाक की याचिका स्वीकार कर ली और पेंड्रारोड निचली अदालत का फैसला रद्द करते हुए तलाक मंजूर कर दिया।

Share

 

 

 

 

 

You Missed