बिलासपुर, 08 सितम्बर 2026। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पंचायत चुनाव में उम्मीदवार की उम्र और जन्मतिथि को लेकर अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आधार कार्ड और वोटर ID में दर्ज जन्मतिथि को उम्र का अंतिम प्रमाण नहीं माना जा सकता। जन्मतिथि निर्धारित करने के लिए जन्म प्रमाण पत्र, मान्यता प्राप्त बोर्ड की मैट्रिक मार्कशीट और स्कूल रिकॉर्ड को अधिक महत्व दिया जाएगा।
मामला बलरामपुर-रामानुजगंज जिले की ग्राम पंचायत कृष्णानगर का है। यहां जसिला तिथियो ने सरपंच पद के लिए चुनाव लड़ा था। 22 फरवरी 2025 को हुए पंचायत चुनाव में उन्हें सबसे अधिक वैध वोट मिले और वे सरपंच निर्वाचित हुईं।

21 साल की उम्र पूरी नहीं होने का आरोप
जसिला के खिलाफ चुनाव में प्रतिद्वंद्वी उम्मीदवार सूरजपती राम ने चुनाव याचिका दायर की। इसमें आरोप लगाया गया कि जसिला की वास्तविक जन्मतिथि 12 अप्रैल 2004 है। इस हिसाब से नामांकन के समय उनकी उम्र 21 वर्ष से कम थी।
जसिला के पहली कक्षा से लेकर मैट्रिक तक के शैक्षणिक दस्तावेजों में जन्मतिथि 12 अप्रैल 2004 दर्ज थी। ऐसे में पंचायत चुनाव लड़ने के लिए निर्धारित न्यूनतम उम्र पूरी नहीं होने का मामला सामने आया।
चुनाव ट्रिब्यूनल ने भी रद्द किया था चुनाव
मामले की सुनवाई के बाद 25 सितंबर 2025 को चुनाव ट्रिब्यूनल ने प्रतिद्वंद्वी की याचिका स्वीकार कर जसिला तिथियो का चुनाव शून्य घोषित कर दिया था। इसके खिलाफ जसिला ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
सुनवाई के दौरान जसिला ने 5 जुलाई 2025 को अपडेट कराया गया जन्म प्रमाण पत्र भी पेश किया। इसमें उनकी जन्मतिथि 12 अप्रैल 2002 दर्ज थी। हालांकि, हाईकोर्ट ने इस दस्तावेज को स्वीकार करते हुए पुरानी शैक्षणिक प्रविष्टियों को नजरअंदाज नहीं किया, क्योंकि नया प्रमाण पत्र चुनाव याचिका दायर होने के बाद जारी कराया गया था।
हाईकोर्ट ने ट्रिब्यूनल का फैसला रखा बरकरार
जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद ने 7 सितंबर को फैसला सुनाते हुए कहा कि जन्मतिथि निर्धारित करने में जन्म प्रमाण पत्र, मान्यता प्राप्त बोर्ड का मैट्रिक प्रमाण पत्र और स्कूल रिकॉर्ड महत्वपूर्ण दस्तावेज हैं।
कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 243-F का हवाला देते हुए कहा कि पंचायत चुनाव लड़ने के लिए उम्मीदवार की उम्र कम से कम 21 वर्ष होना जरूरी है। उपलब्ध शैक्षणिक रिकॉर्ड के आधार पर जसिला नामांकन के समय निर्धारित उम्र पूरी नहीं करती थीं।
हाईकोर्ट ने चुनाव ट्रिब्यूनल के आदेश को बरकरार रखते हुए जसिला की रिट याचिका खारिज कर दी। इस फैसले के साथ कृष्णानगर ग्राम पंचायत के सरपंच चुनाव को लेकर विवाद पर फिलहाल विराम लग गया है।





