11 Sep 2026, Fri
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सर्पदंश मुआवजा घोटाला: फर्जी पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आरोप में घिरीं डॉक्टर प्रियंका सोनी को हाईकोर्ट ने दी स्थायी जमानत

बिलासपुर, 11 सितम्बर 2026। बहुचर्चित सर्पदंश मुआवजा घोटाला मामले में आरोपी डॉक्टर प्रियंका सोनी को बिलासपुर हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। फर्जी पोस्टमार्टम रिपोर्ट जारी करने के आरोप में घिरीं डॉ. प्रियंका को कोर्ट ने सुनवाई के बाद स्थायी जमानत दे दी है।

डॉ. प्रियंका सोनी पर सर्पदंश से मौत के तीन मामलों में कथित तौर पर फर्जी पोस्टमार्टम रिपोर्ट जारी करने का आरोप है। जमानत आवेदन पर उनके अधिवक्ता ने कोर्ट में दलील दी कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा तैयार की जाती है। किसी विशेषज्ञ की रिपोर्ट को गलत या फर्जी साबित करने के लिए विशेषज्ञ कमेटी की रिपोर्ट जरूरी है।

अधिवक्ता ने तर्क दिया कि इस मामले में बिना किसी विशेषज्ञ कमेटी की रिपोर्ट के ही डॉक्टर को आरोपी बनाया गया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट की विशेषज्ञ स्तर पर जांच कर उसे खारिज किए जाने की प्रक्रिया भी पूरी नहीं की गई। मामले के तथ्यों और इन तर्कों पर विचार करने के बाद एकलपीठ ने डॉ. प्रियंका सोनी को स्थायी जमानत प्रदान कर दी।

मुआवजा हासिल करने के लिए गिरोह सक्रिय होने का आरोप

पुलिस की जांच में सरकारी मुआवजा हासिल करने के लिए कथित तौर पर एक संगठित गिरोह के सक्रिय होने की जानकारी सामने आई थी। सिम्स में सर्पदंश से मौत का मामला सामने आते ही गिरोह से जुड़े लोगों को इसकी सूचना मिल जाती थी। इसके बाद मृतक के परिजनों से संपर्क कर उन्हें सरकारी मुआवजा योजना की जानकारी दी जाती और प्रकरण तैयार कराने की प्रक्रिया शुरू की जाती थी।

जांच में आरोप है कि कुछ मामलों में बीमारी से हुई मौत को सर्पदंश से हुई मौत बताने के लिए शव पर सांप के काटने जैसे निशान बनाए गए। इसके बाद कथित तौर पर फर्जी पोस्टमार्टम रिपोर्ट, मर्ग पंचनामा और पटवारी प्रतिवेदन तैयार कर मुआवजा प्रकरण आगे बढ़ाए गए।

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तहसील कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के घेरे में

मामले की जांच के दौरान तहसील कार्यालय में पदस्थ कुछ कर्मचारियों की भूमिका भी पुलिस के रडार पर आई है। जांच में कुछ प्रकरणों में चिकित्सकों के कथित फर्जी हस्ताक्षरों के इस्तेमाल की बात भी सामने आई।

पुलिस के अनुसार, रतनपुर थाने में दर्ज एक मामले में हार्ट अटैक से हुई मौत को सर्पदंश से हुई मौत बताकर सरकारी मुआवजा हासिल करने का प्रयास किया गया। वहीं कोनी थाना क्षेत्र में दर्ज तीन मामलों के दस्तावेजों में पोस्टमार्टम रिपोर्ट, मर्ग इंटीमेशन और पटवारी प्रतिवेदन में गड़बड़ी मिलने की बात सामने आई है।

पुलिस अब तक इस मामले में 15 प्रकरणों में एफआईआर दर्ज कर चुकी है। घोटाले से जुड़े अन्य आरोपियों और पूरे नेटवर्क की भूमिका की भी जांच जारी है।

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