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कलिंगा यूनिवर्सिटी में घरेलू उपचार पर वर्कशॉप : 200 से ज्यादा छात्रों ने सीखे प्राकृतिक सामग्रियों से इलाज की तैयारी और सुरक्षित इस्तेमाल के तरीके

रायपुर, 26 सितंबर 2026। कलिंगा विश्वविद्यालय के विज्ञान संकाय द्वारा जैव प्रौद्योगिकी विभाग और योग विभाग के सहयोग से “सामान्य बीमारियों के लिए घरेलू उपचार की तैयारी” विषय पर कार्यशाला आयोजित की गई। विश्वविद्यालय के ऑडिटोरियम में आयोजित इस कार्यक्रम में कलिंगा विश्वविद्यालय और माता कर्मा कॉलेज, महासमुंद के 200 से अधिक विद्यार्थियों एवं संकाय सदस्यों ने भाग लिया।

कार्यशाला का आयोजन बायोविजन (BioVision) और कैंपस ऑन (Campus On) के सहयोग से किया गया। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को आसानी से उपलब्ध और किफायती प्राकृतिक सामग्रियों के माध्यम से पारंपरिक स्वास्थ्य पद्धतियों के प्रति जागरूक करना था। कार्यक्रम में घरेलू उपचारों के जिम्मेदार उपयोग, तैयारी की बुनियादी तकनीक, स्वच्छता और घरेलू समाधानों की वैज्ञानिक सीमाओं पर जानकारी दी गई।

कार्यक्रम को संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) से भी जोड़ा गया। इनमें SDG 3—अच्छा स्वास्थ्य एवं कल्याण, SDG 4—गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और SDG 12—जिम्मेदार उपभोग एवं उत्पादन प्रमुख रहे।

उद्घाटन समारोह में डॉ. मोनिका सेठी शर्मा, प्रति-कुलपति, कलिंगा विश्वविद्यालय, डॉ. बेंदी अंजनेयुलु, उप डीन-शैक्षणिक मामले एवं प्रभारी डीन, विज्ञान संकाय तथा डॉ. सुषमा दुबे, विभागाध्यक्ष, जैव प्रौद्योगिकी विभाग एवं कार्यक्रम समन्वयक उपस्थित रहीं।

कार्यशाला में कलिंगा विश्वविद्यालय के योग विभागाध्यक्ष डॉ. राजेश कुमार मानिक मुख्य विषय-विशेषज्ञ के रूप में शामिल हुए। उन्होंने पारंपरिक स्वास्थ्य पद्धतियों से जुड़े व्यावहारिक पहलुओं की जानकारी दी और प्राकृतिक सामग्रियों की उचित तैयारी एवं उपयोग का प्रदर्शन किया।

कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों के लिए संवादात्मक प्रश्नोत्तरी सत्र भी आयोजित किया गया। समापन अवसर पर डॉ. मोनिका सेठी शर्मा और डॉ. बेंदी अंजनेयुलु ने अंतर-विषयक अध्ययन के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि पारंपरिक उपचार पद्धतियों को समझने के साथ-साथ उनके प्रति वैज्ञानिक और प्रमाण-आधारित दृष्टिकोण बनाए रखना आवश्यक है।

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आयोजकों के अनुसार, इस प्रकार की अंतर-विषयक पहल विद्यार्थियों को जैव प्रौद्योगिकी, पारंपरिक स्वास्थ्य पद्धतियों और टिकाऊ जीवनशैली के बीच संबंध समझने का अवसर देती है। इससे वैज्ञानिक रूप से जिम्मेदार स्वास्थ्य पद्धतियों के प्रति जागरूकता बढ़ाने में भी मदद मिलती है।

कार्यक्रम के अंत में डॉ. सुषमा दुबे ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। उन्होंने विश्वविद्यालय के नेतृत्व, अतिथि संकाय सदस्यों और सभी प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। इनमें माता कर्मा गर्ल्स कॉलेज की 50 से अधिक छात्राएं भी शामिल रहीं।

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